मनाने की कोशिश जारी, बाबा ने दिया मिला-जुला संकेत

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केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार के मंत्रियों और योग गुरू रामदेव के बीच हुई कई बैठकों के बावजूद बाबा रामदेव अभी तक अपने रूख़ - 'अनशन जारी रहेगा', पर अड़े हुए हैं. हालांकि वो सरकार से कई मुद्दों पर बनी सहमति की बात भी करते दिखे.

रामलीला मैदान पर शुक्रवार सुबह समर्थकों को संबोधित करते हुए एक ओर जहाँ रामदेव ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि शनिवार से अनशन करने का उनका इरादा अभी बदला नहीं है. वहीं दूसरे ही पल वे ये कहते हुए भी नज़र आए कि सरकार के साथ बातचीत में एक-दो मुद्दों को छोड़कर बाकी मुद्दों पर अच्छी सहमति बनती नज़र आ रही है.

योग गुरु और मंत्रियों के बीच दिल्ली के एक होटल में बैठक जारी है.

बाबा रामदेव के आंदोलन को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के समर्थन के बाद ये आरोप लग रहा है कि बाबा रामदेव का कथित राजनीतिक एजेंडा पर. इस पर बाबा का कहना है कि उनका आंदोलन निर्दलीय है.

रामलीला मैदान पर तैयारियाँ की तस्वीरें

बाबा ने दो टूक शब्दों में कहा, “हमारा आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के ख़िलाफ़ नहीं है. हम किसी दल के पोषक या विध्वंसक नहीं हैं. हम सर्वदलीय और निर्दलीय हैं.”

ये आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि आंदोलन पर अच्छा ख़ासा पैसा खर्च किया जा रहा है. इस पर बाबा रामदेव ने सफ़ाई देते हुए कहा, "जहाँ तक आंदोलन पर पैसा खर्च करने की बात है तो अगर लोगों की मेहनत का 25-50 लाख लगाकर करोड़ों का काला धन वापस आता है तो क्या ग़लत है?"

सरकार में खींचतान

रामलीला मैदान पर उन्होंने अपनी पुरानी माँगे दोबारा दोहराई- काला धन वापस लाओ, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सख़्ती, भ्रष्टाचार के दोषी लोगों को फाँसी, देश में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को महत्व, भूमि अधिग्रहण क़ानून में बदलाव.

बाबा ने कहा, "जो देश सदाचार में नंबर वन था वो भ्रष्टाचार में नंबर वन हो गया, जनसंख्या वृद्धि में नंबर वन हो गया, गंदगी में नंबर वन हो गया, भूख में, ग़रीबी में, अशिक्षा में, अभाव में नंबर वन हो गया ये देखकर हमारे दिल में बहुत वेदना और पीड़ा होती है."

बाबा के समर्थन में रामलीला मैदान पर लोगों का जमावड़ा लगना शुरु हो चुका है. इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं.

अलग-अलग प्रदेशों से आए लोगों के पंडालों में पंजीकरण के लिए भीड़ लगी हुई है. अलग-अलग वेश भूषा और भाषा के लोग भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यहाँ लामबंद दिखे. मीडिया का भी अच्छा ख़ासा जमावड़ा है.

जोधपुर से नगाड़ों के साथ आया एक बड़ा जत्था अपने पारंपरिक वाद्यों के साथ अपनी बात कहता नज़र आया.

जोधपुर से आई सरिता सचदेवा कहती हैं, “मैं जोधपुर से अपने दो छोटे बच्चों के साथ आई हूँ ताकि देश की सेवा कर सकूँ. इतने बड़े कार्यक्रम में मेरा ये छोटा सा योगदान है.”

बाबा रामदेव ने चार जून से आमरण अनशन पर जाने की घोषणा कर रखी है. बाबा के मुद्दे पर केंद्र सरकार में भी अंदरुनी खींचतान मची हुई है कि कैसे आख़िर उन्हें मना भी लिया जाए और सरकार झुकती हुई भी न नज़र आए.

दो दिन पहले बाबा से मिलने के लिए केंद्र सरकार के चार-चार मंत्री हवाईअड्डे पहुँच गए थे.

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