अमर सिंह, अमिताभ के ख़िलाफ़ मामला

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Image caption अमर सिंह, उनकी पत्नी और अमिताभ बच्चन को नोटिस भेजे गए हैं

भारत सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह, उनकी पत्नी पंकजा सिंह और फ़िल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ मामला दायर किया है.

तीनों लोगों पर विभिन्न कंपनियों में फ़र्ज़ी निवेश करने और पैसे के अवैध हेर-फ़ेर का आरोप है.

ये मामला उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी दल बहुजन समाज पार्टी के एक कार्यकर्ता शिवकांत त्रिपाठी की याचिका के बाद दायर किया गया है.

प्रवर्तन निदेशालय ने छह कंपनियों के फ़र्ज़ी होने के बारे में जाँच शुरू की थी जिनमें अमिताभ बच्चन, अमर सिंह और पंकजा सिंह प्रमुख शेयरधारी हैं.

प्रवर्तन निदेशालय ने ये मामला पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अमर सिंह की उस याचिका को ठुकराए जाने के बाद दायर किया है जिसमें अमर सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप को चुनौती दी थी.

20 मई को अमर सिंह की याचिका को ठुकराते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को इस बारे में व्यापक रूप से जाँच करने का निर्देश दिया था.

अदालत ने निदेशालय को दो सप्ताह के भीतर मामले के सभी काग़ज़ात सौंपे जाने का निर्देश दिया था.

साथ ही उसने प्रवर्तन निदेशालय से काग़ज़ात मिलने के एक महीने के भीतर प्रगति रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था.

मामला

ये मामला उस समय का है जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी.

मुलायम सिंह यादव की सरकार में तत्कालीन पार्टी महासचिव अमर सिंह उत्तर प्रदेश विकास परिषद के अध्यक्ष थे और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था.

समाजवादी पार्टी के सत्ता से बाहर होने के बाद अक्तूबर 2009 में बहुजन समाज पार्टी के एक कार्यकर्ता शिवकांत त्रिपाठी ने एक मामला दायर कर आरोप लगाया था कि अमर सिंह ने अपने पद का दुरूपयोग कर कई ऐसी कंपनियों को हज़ारों करोड़ रूपए के सरकारी ठेके दिए जिनके या तो वे स्वयं मालिक थे या जिनमें उनके शेयर थे.

प्राथमिकी में उनपर कई फ़र्ज़ी कंपनियाँ बनाकर पैसे के अवैध लेन-देन यानी मनी लॉन्डरिंग में लिप्त होने का भी आरोप लगाया गया था.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन कंपनियों में अमर सिंह की पत्नी और उनके दोस्त अमिताभ बच्चन प्रमुख शेयरधारी थे.

इनका जवाब देते हुए अमर सिंह ने आरोप लगाया था कि ये मामले राजनीतिक कारणों से और मुख्यमंत्री मायावती के इशारे पर दायर किए गए हैं.

लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमर सिंह की आपत्तियों पर ध्यान नहीं देते हुए 20 मई को अपने आदेश में कहा कि चूँकि इस मामले में नामित कथित फ़र्ज़ी कंपनियाँ कई राज्यों में निबंधित हैं, इसलिए इस मामले की जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय उपयुक्त है जो कि एक केंद्रीय संस्था है.

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