बाबा के अनशन पर हज़ारों जुटे

बाबा रामदेव का अनशन
Image caption रामदेव के हज़ारों समर्थक रामलीला मैदान पहुंचे हैं.

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें पूरी नहीं करती उनका अनशन जारी रहेगा.

बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में शनिवार सुबह सात बजे अनशन शुरू किया.

देश के कोने-कोने से दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे बाबा रामदेव के हज़ारों समर्थक भी उनके साथ अनशन में हिस्सा ले रहें हैं.

एक अनुमान के अनुसार लगभग तीस हज़ार लोग रामलीला मैदान पहुंच चुके हैं, और लोगों के आने का सिलसिला जारी है.

रामदेव के अनशन के समर्थन में फ़िल्मी दुनिया के कुछ लोग भी ज़ुड़े दिखाई पड़ रहें हैं.

इसी क्रम में भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी मंच पर नज़र आए और लोगों को देशभक्ति के गाने सुनाए.

इससे पहले मंच पर साध्वी ऋतंभरा भी बाबा रामदेव के समर्थन में मौजूद थी.

साध्वी ऋतंभरा पर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में केस चल रहा है.

उनके अलावा एक मुस्लिम धर्म गुरू ने भी लोगों को संबोधित किया और लोगों से बाबा रामदेव के साथ अनशन जारी रखने की अपील की.

बाबा रामदेव शुक्रवार की रात मंच पर ही सोए थे.

कई लोग अपने बिस्तर, तकिया, और खाने-पीने के सामान के साथ रामलीला मैदान पहुंचे हैं.

इतनी तादाद में लोगों के आने के कारण सुरक्षा जांच को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं.

Image caption कई लोग अपने बिस्तर, तकिया, और खाने-पीने के सामान के साथ रामलीला मैदान पहुंचे हैं.

रामदेव ने अपने समर्थकों से कहा है कि जो दिल्ली नहीं आ सकते हैं, वे जहां हैं वहीं से अनशन करें.

रामदेव ने कहा कि उनका आंदोलन ना किसी पार्टी के ख़िलाफ़ है और ना ही किसी पार्टी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता को मंच से भाषण देने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

इस मौक़े पर रामदेव ने उनको वित्तिय मदद देने वाले समर्थकों को भी मीडिया के सामने पेश किया.

झारखंड के राजकुमार ने उनको ग्यारह लाख रुपए का चेक भेंट किया.

उनके अलावा एक एनआरआई भी मौजूद थे जिन्होंने कथित तौर पर स्कॉटलैंड में उन्हें द्वीप तोहफ़े में दिया है. रामदेव ने ख़ास तौर पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि उनके समर्थक उन्हें जो भी आर्थिक मदद करते हैं वो काला धन नहीं होता.

Image caption रामलीला मैदान के बाहर एक नक्शा सारे इंतज़ाम की जानकारी देता है.

ग़ौरतलब है कि अनशन के लिए पैसे कहां से आ रहें हैं इसको लेकर मीडिया में उनके ख़िलाफ़ आवाज़े उठ रही हैं. शायद इसी का जवाब देने के लिए रामदेव ने अपने कुछ समर्थकों को मीडिया के सामने पेश किया.

इससे पहले शुक्रवार शाम को अपने हज़ारों समर्थकों और मीडिया से बात करते हुए रामदेव ने कहा था, "जबतक हमारे मूद्दे पूरी तरह से सौ प्रतिशत प्रमाणिकता के साथ, वैधानिक तरीक़े से नहीं मानी जाएंगी, हमारा अनशन जारी रहेगा."

साथ ही रामदेव ने सरकार को ये कहते हुए खुली चुनौती भी दी कि वो अपने कार्यक्रम को किसी भी सूरत में हिंसक नहीं होने देंगे "लेकिन यदि उन्हें दबाने और कुचलने की कोशिश की गई तो ठीक नहीं होगा."

"ना आजतक रामदेव को कोई दबा पाया है. ना ख़रीद पाया है."

उन्होंने दावा किया कि भारत का 400 लाख करोड़ काला धन विदेशों में ग़ैरक़ानूनी तरह से जमा किया गया है और इसे जल्द से जल्द वापस लाने की कारवाई शुरू की जानी ज़रूरी है.

बातचीत विफल

इससे पहले शुक्रवार को रामदेव और केंद्र सरकार के बीच बातचीत विफल हो गई.

दिल्ली के एक पाँच सितारा होटल में मनमोहन सिंह सरकार के दो प्रतिनिधि मंत्रियों कपिल सिबल और सुबोध कांत सहाय के साथ हुई बैठक से निकलने के बाद बाबा रामदेव सीधे महात्मा गाँधी के समाधि स्थल राजघाट चले गए जहाँ से वो बाद में कार्यक्रम स्थल रामलीला मैदान पहुँचे.

बैठक मे शामिल केंद्रीय संचार मंत्री कपिल सिबल ने पहले कहा था कि इस तरह के मुद्दों पर फ़ैसला एक दिन में नहीं तलाशा जा सकता है. ऐसे मुद्दों के दूरगामी परिणाम होते हैं.

हालांकि कपिल सिबल ने दावा किया, "हमने कई बातें उनके सामने रखी हैं जिनमें कई मुद्दों पर सहमति है."

Image caption कपिल सिब्बल और सुबोध कांत सहाय से बाबा रामदेव की पांच घंटों तक चली बातचीत विफल हो गई.

सरकार और अपने बीच सहमति की बात बाबा रामदेव ने भी दिन में कही थी. हालांकि उन्होंने तब भी कहा था कि उनका सत्याग्रह जारी रहेगा.

बैठक रामदेव की दोपहर की घोषणा के बाद शुरू हुई थी.

जब कुछ हलकों में ये ख़बर आनी शूरू हुई थी कि रामदेव एक सांकेतिक भूख हड़ताल ही करेंगे क्योंकि सरकार के साथ उनका समझौता हो गया है तो ये सवाल भी उठा था कि क्या रामदेव का अब पीछे हटना उनके समर्थकों को भाएगा. लोगों का कहना है कि उनके समर्थकों के कई जत्थे कई दिनों से दिल्ली के रामलीला मैदान में जमे हैं, लोगों ने अनशन कार्यक्रम के लिए दान दिए है.

जानकार कहते हैं कि रामदेव पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानि आरएसएस और उससे जूड़ी संस्थाओं का भी दबाव हो सकता है जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन किया है.

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