रामदेव पर केंद्र से जवाब तलब

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर दाख़िल की गई एक अर्ज़ी को सुनने से मना कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल पर बैठे योग गुरू बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को वहाँ से जबरन हटाए जाने पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है.

अदालत ने इस मामले का अपने आप संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन और पुलिस को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के बीच इसका जवाब देने को कहा है.

मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ़्ते में होगी.

शनिवार देर रात मे दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के दस्तों ने रामदेव के शिविर में घुसकर उन्हें और उनके समर्थकों से रामलीला मैदान ख़ाली करवा लिया था.

पुलिस ने अपनी कार्रवाई के दौरान आँसू गैस के गोले भी छोड़े थे.

पुलिस पर लोगों पर लाठियाँ बरसाने का आरोप भी लगाया गया है जिसमें काफ़ी लोगों को काफ़ी चोटें आई हैं.

लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने कहा है कि लोगों को चोटें वहाँ मची भगदड़ की वजह से हुई न कि पुलिस की लाठियों से. उन्होंने पुलिस के लाठी के प्रयोग की बात से इनकार किया है.

अनशन जारी

इस बीच एक सरकारी हवाई जहाज़ से दिल्ली से हरिद्वार पहुँचाए गए रामदेव ने अपने आश्रम में अपना आमरण अनशन जारी रखा है.

उन्होंने केंद सरकार से कई दौर की बातचीत के विफल होने के बाद शनिवार से आमरण अनशन शुरू किया था.

हालांकि रामदेव ने रविवार रात में कहा था कि वो दुबारा दिल्ली जाने की कोशिश करेंगे और अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो दिल्ली के पास के किसी इलाक़े में अपना कार्यक्रम जारी रखेंगे.

लेकिन दिल्ली से सटे नोएडा में करने की उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति देने से मना कर दिया.

हालांकि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने रामदेव के साथ दिल्ली पुलिस की कथित ज़्यादतियों के खिलाफ़ कड़ा विरोध दर्ज कराया था.

Image caption पुलिस के आने पर रामदेव के समर्थकों ने उन्हें चारों ओर से घेरे में ले लिया था.

रामदेव के दिल्ली में प्रवेश पर प्रशासन ने पाबंदी लगा रखी है.

सोमवार को समर्थकों से बात करते हुए कहा, "पूरे देश में केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ घृणा का माहौल बना है. लोगों ने देखा कि पुलिस ने किस तरह का बर्बर व्यवहार लोगों के साथ किया, यहाँ तक के बच्चों और महिलाओं के ऊपर भी."

योग गुरू और उनके समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई की भारतीय जनता पार्टी समेत लगभग सभी विपक्षी राजनीतिक दलों ने निंदा की है.

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने इसे 'भारतीय प्रजातंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन बताया है.'

बीजेपी नेता पुलिस कार्रवाई के विरोध में रविवार शाम से 24 घंटे का सत्याग्रह कर रहे हैं.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पहले मुहिम चला चुके गाँधीवादी नेता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वो सोमवार को होनेवाली लोकपाल समिति की बैठक मे हिस्सा नहीं लेंगे.

ये समिति लोकपाल क़ानून का मसौदा तैयार करने के लिए बनाई गई थी.

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