लैगार्ड से कोई वादा नहीं किया: प्रणब

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Image caption समर्थन की तलाश में लैगार्ड दुनिया के कई देशों की यात्रा पर हैं

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) प्रमुख पद के लिए समर्थन जुटाने भारत पहुँची फ़्रांस की वित्त मंत्री क्रिस्टीन लैगार्ड ने भारतीय प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात की है.

हालांकि प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि लैगार्ड से कोई भी वादा नहीं दिया गया है, और वो सर्वसम्मति से किसी फ़ैसले पर पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं.

समर्थन की तलाश में लैगार्ड दुनिया के कई देशों की यात्रा पर हैं. कुछ समय पूर्व ब्राज़ील पहुँची लैगार्ड ने कहा था कि आईएमएफ़ में सुधार की आवश्यकता है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज़्यादा प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

आईएमएफ़ की ज़रूरत किसे हैं?

आईएमएफ़ के अध्यक्ष का पद डॉमिनिक स्ट्रॉस कान के इस्तीफ़े के बाद ख़ाली हो गया है. कान पर एक होटल की महिला कर्मचारी पर बलात्कार के प्रयास के आरोप लगे थे जिसके बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

मंगलवार को हुई प्रेसवार्ता में लैगार्ड ने कहा कि जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उच्च पदों पर लोगों का चुनाव होता रहा है, उस बारे में विकासशील देशों में चिंता रही है, और वो विकासशील देशों के नेताओं को बताने की कोशिश कर रही हैं कि वो इस पद के लिए क्यों उपयुक्त हैं, और वो नेताओं से भी सुन कर उनके विचार जान रही हैं कि उन्हें चुनाव प्रक्रिया से क्या शिकायत है.

उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोश किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे विश्व का है. और चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए."

भारत के बाद वो चीन जाएंगी, बाद में जेद्दाह, और फिर काहिरा भी जाएँगी.

शक्ति संतुलन में बदलाव

विकासशील देशों का कहना है कि आईएमएफ़ प्रमुख का चुनाव योग्यता के आधार पर होना चाहिए, और इस संस्था के सभी पूर्व प्रमुख यूरोप से रहे हैं.

विकासशील देशों के मुताबिक हाल ही में विकसित देशों में आए आर्थिक संकट से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय वित्त संगठनों में सुधार की ज़रूरत महसूस हुई है. उनका कहना है कि विकासशील देशों को भी विश्व अर्थव्यवस्था में उनके बढ़ते कद के मुताबिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

इन देशों के मुताबिक नया आईएमएफ़ प्रमुख ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो बदलते वक्त के मुताबिक इस संस्था में बदलाव ला सके.

पिछले कुछ वर्षों में जहाँ विकसित देशों में अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में कमी आई है, विकासशील देशों के विकास दर में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है.

अहलुवालिया का नाम ख़ारिज

भारत के एकमात्र संभव उम्मीदवार मोंटेक सिंह अहलूवालिया का नाम इस पद के उम्मीदवारों की सूची से पहले ही खारिज हो चुका है क्योंकि उनकी उम्र आईएमएफ़ की रिटायरमेंट उम्र से ज़्यादा है.

अहलूवालिया 68 साल के हैं, जबकि आईएमएफ़ की रिटायरमेंट उम्र 65 है.

वर्ष 1956 में पेरिस में जन्मी लैगार्ड दो बच्चों की माँ हैं.

मेक्सिको केंद्रीय बैंक गवर्नर ऑगस्टीन कार्सट्न को लैगार्ड का प्रमुख प्रतिद्वंदी बताया जा रहा है. आईएमएफ़ प्रमुख का चुनाव महीने के अंत तक होना है.

भारतीय सोच

सामरिक मामलों के जानकारी ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक भारत चाहेगा कि वो किसी विकासशील देश के प्रत्याशी को समर्थन दे, हालांकि अभी तक ऐसा कोई व्यक्ति उभरा नहीं है.

वो कहते हैं, ‘भारत क्रिस्टीन लैगार्ड को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि भारत विकासशील देश के किसी प्रत्याशी को समर्थन देना उचित समझेगा. उधर चीन विकासशील देश का प्रत्याशी का समर्थन नहीं करेगा, और वो कोई निजी सौदा करेगा.’

चेलानी के मुताबिक पद के लिए लैगार्ड की दावेदारी सबसे मज़बूत है.

लेकिन विकासशील देशों की दावेदारी क्यों मज़बूत नहीं?

चेलानी कहते हैं कि अभी तक बड़े मुद्दों पर विकासशील देशों में तालमेल की कमी रही है और आईएमएफ़ प्रमुख के पद का मामला इस बारे में एक टेस्ट केस बन सकता है, हालाँकि वो विकासशील देश के किसी उम्मीदवार के जीतने के प्रति आश्वस्त नहीं है.

वो कहते हैं, ‘जितना भी पैसा आईएमएफ़ को मिलता है, उसका करीब आधा जापान और विकासशील देशों से आता है. आईएमएफ़ कोष में विकसित देशों का हिस्सा पचास प्रतिशत से कम हो गया है. मगर जहाँ तक वोटिंग की बात है, वो ढांचा अलग है. जापान और विकासशील देशों का वोटिंग अधिकार पचास प्रतिशत से बहुत कम है. इसलिए अगर विकासशील देशों का कोई प्रत्याशी होता भी है, तो उनका जीतना बहुत मुश्किल है.’

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