पीयूसीएल की गतिविधियों पर नज़र

छत्तीसगढ़ की सरकार ने मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. राज्य के गुप्तचर विभाग ने सभी ज़िलों को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें संगठन के कार्यकलापों की जानकारी मांगी गई है.

हालाँकि आधिकारिक रूप से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से परहेज़ कर रहे हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि ज़िलों में पीयूसीएल की गतिविधियों का ब्यौरा तैयार किया जा रहा है.

समझा जा रहा है कि यह सब कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद शुरू हुआ है. सेन पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उन्हें राष्ट्रद्रोह और माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में रायपुर की एक निचली अदालत नें उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट नें उन्हें ज़मानत देते हुए कहा है कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला नहीं बनता है.

हाल ही में अपने महासमुंद ज़िले के प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कँवर ने सर्किट हॉउस में पत्रकारों से बात करते हुए यह भी संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार पीयूसीएल पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही है. कँवर का मानना है कि यह संगठन माओवादी छापामारों को हथियार मुहैया कराने का काम भी करता है. हालाँकि इस बारे में बाद में गृह मंत्री ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है, लेकिन उनके विभाग के सूत्रों का कहना है कि पीयूसीएल के अलावा राज्य सरकार सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के छत्तीसगढ़ आने पर भी रोक लगा सकती है.

इससे पहले बीबीसी से बात करते हुए कँवर ने स्पष्ट किया था कि छत्तीसगढ़ की सरकार स्वामी अग्निवेश की गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए है.

घबराहट

पीयूसीएल ने छत्तीसगढ़ की सरकार के इस रुख़ का विरोध किया है. संगठन का कहना है कि उनके सदस्य एक संविधान से बंधे हुए हैं और इस तरह के आचरण में किसी की भी संलिप्तता नहीं है.

संगठन के प्रवक्ता शशि भूषण पाठक कहते हैं, "यह सरकार की घबराहट है. जिस तरीक़े से घटनाएं दिल्ली में होती रहीं है अन्ना हज़ारे को लेकर और बाबा रामदेव को लेकर और बिनायक सेन को लेकर छत्तीसगढ़ में जो कुछ हुआ. यह साफ़ प्रदर्शित करता है कि सरकारें घबरा रहीं हैं. सरकारें उन प्रजातांत्रिक मूल्यों को बाँटना नहीं चाहती हैं जनता के साथ. जिस लोकतंत्र की हिमायत सरकार और सिविल सोसाइटी के कई धड़े कर रहे हैं पीयूसीएल मदद ही करने वाला है. हमारा संगठन संविधान के दायरे में जो मानवाधिकार का हनन हो रहा है उस पर सरकार को सचेत करने का काम कर रहा है."

पाठक का कहना है कि उनके संगठन में सभी राजनीतिक विचारधारा के लोग जुड़े हुए हैं. पाठक कहते हैं, "रमन सिंह के मित्र अरुण शौरी हमारे राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद पीयूसीएल की बिहार-झारखंड इकाई के महासचिव रहे हैं. अगर रविशंकर प्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान ग़ैर क़ानूनी कार्य किए हैं तो हम पर ज़रूर प्रतिबंध लगाना चाहिए."

छत्तीसगढ़ की सरकार की इस पहल के बाद राज्य में काम कर रहे सामजिक संगठनों में आक्रोश का माहौल है. सामजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसा कर सरकार सामाजिक कार्यकर्ताओं को भयभीत करने का काम कर रही है.

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