'माओवादी छापामारों' की सामूहिक क़ब्र

नक्सलवादी

पूर्वी और मध्य भारत के एक बड़े क्षेत्र में माओवादियों का प्रभाव है.

झारखंड पुलिस का कहना है कि राजधानी रांची से लगे खूंटी जिले में उसे एक सामूहिक क़ब्र मिली हैं जिससे 14 शवों को बरामद किया गया है.

राज्य के पुलिस महानिदेशक गौरी शंकर रथ ने कहा है कि ऐसा लगता है कि कब्र में माओवादी छापामारों को मुठभेड़ के बाद लाकर दफनाया गया था.

यह पहला मौक़ा है जब पुलिस को इस तरह की कोई क़ब्र मिली है.

क़ब्र का पता स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों के एक अभियान के दौरान चला. ये सामूहिक क़ब्र एक छोटी सा पहाड़ी के ऊपर मौजूद है.

क़ब्र का पता लगने के बाद अधिकारियों ने इसे खोदने का आदेश दिया. जिसके बाद उसमें से अबतक 14 शवों को बरामद किया जा चुका है.

पुलिस का कहना है कि खुदाई के बाद निकाले गए शवों को देखने से लगता है कि इनमें से सभी की मौत गोली लगने से हुई थी.

अधिकारियों का कहना है, "इनमें से ज़्यादातर लोगों के बदन पर उसी तरह की वर्दी है जो अमूमन माओवादी छापामार पहनते हैं."

हालांकि पुलिस अभी यह नहीं बता पा रही है कि इस इलाके में पुलिस और माओवादियों की मुठभेड़ कब हुई थी.

फिलहाल पुलिस इस क़ब्र के संदर्भ में और जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है.

सघन अभियान

ऐसा माना जाता है कि नक्सल प्रभावित राज्यों - ख़ास तौर पर झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में ऐसे कई स्थान हैं जहाँ माओवादी छापामारों की सामूहिक कब्रें मौजूद हो सकती हैं.

इन सभी राज्यों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के ख़िलाफ़ सघन अभियान चला रखा है और आए दिन पुलिस और माओवादी गुरिल्लाओं के बीच मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं.

हालांकि ज़्यादातर मुठभेड़ में पुलिस को गुरिल्लाओं की लाशें नहीं मिल पाती हैं. कहा जाता है कि माओवादी मारे गए गुरिल्लाओं की लाश साथ ले जाते हैं.

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