हत्यारों को पकड़ने की माँग तेज़

ज्योतिर्मय डे

मिड डे अख़बार के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की दिन दहाड़े हत्या

देश के कई पत्रकार संगठनों ने ज्योतिर्मय डे हत्याकांड के दोषियों को जल्द से जल्द पकड़े जाने की माँग करते हुए प्रदर्शन किए हैं.

पत्रकार संगठनों ने अब तक डे के हत्यारों का कोई सुराग़ न मिलने पर गहरे रोष का इज़हार किया है.

दक्षिण एशियाई पत्रकारों के एक प्रमुख संगठन का कहना है कि पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या शक्तिशाली लोगों का पर्दाफ़ाश करने की कोशिश की वजह से हुई.

दैनिक अख़बार मिड डे के खोजी पत्रकारों की टीम के प्रमख ज्योतिर्मय की हत्या मुंबई के उपनगर पवई में दिन दहाड़े गोली मारकर कर दी गई.

साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन (साफ़्मा) ने उनकी तुलना पाकिस्तान के पत्रकार सलीम शहज़ाद से की है जिनकी हत्या का आरोप पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर लगाया जा रहा है.

मुंबई में हुई हत्या औऱ पाकिस्तान में हुई सलीम शहज़ाद की हत्या में कई समानताएँ हैं. यह स्पष्ट है कि दोनों शक्तिशाली लोगों की पोल खोलने का साहस दिखाने की वजह से मारे गए

साउथ एशिया मीडिया कमीशन

साफ़्मा ने महाराष्ट्र सरकार से अपील की है कि वह ज्योतिर्मय डे की हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों को दंडित करने में कोई कसर न छोड़े.

महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने भी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से मिलकर माँग की है कि इस मामले में दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक क़दम उठाए जाएँ.

ज्योतिर्मय डे ने तेल माफ़िया और आपराधिक गिरोहों की सांठगांठ पर कई रिपोर्टें लिखी थीं और उन्हें जान से मार दिए जाने की धमकियाँ भी मिली थीं.

साउथ एशिया मीडिया कमीशन इंडिया ने, जो साफ़्मा के अधीन काम करता है, माँग की है कि मामले की जाँच देश सीबीआई या अन्य किसी दक्ष एजेंसी से कराई जाए ताकि जल्द से जल्द सच सामने आ सके.

पत्रकार संगठन के अध्यक्ष केके कत्याल ने कहा, "देश के नेता मारे गए पत्रकार के बारे में सहानुभूति के जो शब्द कह रहे हैं वह किसी तरह की कार्रवाई में परिणत होना चाहिए, मीडियाकर्मियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, ख़ास तौर पर उन्हें जो ऐसी ख़बरों को लोगों तक पहुँचाते हैं जिनमें माफ़िया की गतिविधियों का पर्दाफ़ाश किया जाता है."

साउथ एशिया मीडिया कमीशन इंडिया की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि "मुंबई में हुई हत्या औऱ पाकिस्तान में हुई सलीम शहज़ाद की हत्या में कई समानताएँ हैं. यह स्पष्ट है कि दोनों शक्तिशाली लोगों की पोल खोलने का साहस दिखाने की वजह से मारे गए."

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