मारुति में कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म

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भारत में कार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड के मानेसर प्लांट में 13 दिनों से चल रही हड़ताल ख़त्म हो गई है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हूड्डा की पहल पर प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों में समझौता हुआ है.

मारुति सुज़ुकी प्रबंधन ने निकाले गए 11 कर्मचारियों को फिर बहाल करने का फ़ैसला किया है, लेकिन उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक जाँच शुरू की जाएगी. कर्मचारी संगठनों ने अलग यूनियन बनाने की मांग छोड़ दी है.

प्रबंधन ने हड़ताल की अवधि का वेतन देने के मामले पर भी लचीला रुख़ अपनाने का आश्वासन दिया है.

हरियाणा के श्रम सचिव सरबन सिंह ने हड़ताल ख़त्म होने की घोषणा की और कहा, "समझौते पर दस्तख़त हो गए हैं. कर्मचारियों ने हड़ताल ख़त्म करने का फ़ैसला किया है. वे शुक्रवार से काम पर लौट जाएँगे."

गुरुवार को दिन पर बातचीत चलती रही. श्रम और रोज़गार मंत्री शिवचरण लाल शर्मा और सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों और प्रबंधन के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई.

नुक़सान

माना जा रहा है कि हड़ताल के कारण 15 हज़ार गाड़ियों का निर्माण नहीं हो पाया और कंपनी को 700 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ.

मारुति की मानेसर प्लांट के क़रीब 2,000 कर्मचारी चार जून से हड़ताल पर थे. हड़ताल पर गए कर्मचारी एक नए कर्मचारी संगठन को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे.

वे चाहते थे कि मानेसर प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों की मारुति सुज़ुकी कर्मचारी यूनियन को कंपनी मान्यता दे.

कर्मचारियों का कहना था कि फ़िलहाल कंपनी में जो मजदूर यूनियन है, उसमें ज़्यादातर सदस्य मारुति के गुड़गांव स्थित प्लांट के हैं और उनकी समस्याएं वहां काम कर रहे कर्मचारियों के मुद्दों से बिलकुल अलग हैं.

साथ ही उनकी ये भी मांग थी कि प्लांट में बन रही दो नई यूनिट के कर्मचारियों के अनुबंध पत्र को पक्का किया जाए.

इससे पहले मारुति के कर्मचारियों ने साल 2000 के नवंबर से लेकर 2001 में जनवरी तक बहुत बड़ी हड़ताल की थी, जिससे गाड़ियों के निर्माण पर बहुत बुरा असर पड़ा था.

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