'बीपी सिंह हत्याकांड की गुत्थी सुलझी'

मायावती
Image caption इस हत्याकांड से मुख्यमंत्री मायावती की बहुत किरकिरी हुई थी.

उत्तर प्रदेश सरकार ने खुलासा किया है कि राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित डाक्टर बीपी सिंह हत्या कांड का षड्यंत्र रचने वाले कोई और नहीं बल्कि उन्हीं के मातहत तैनात एक डाक्टर वाईएस सचान थे.

मृत डाक्टर बीपी सिंह परिवार कल्याण विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे, जबकि डॉक्टर सचान उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी थे.

कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पुलिस ने तीनों कथित भाड़े के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया है. इनके नाम हैं राम कृष्ण वर्मा, अनंत तिवारी और विनोद शर्मा.

शशांक शेखर के अनुसार उनके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल, मोबाइल फोन और गाड़ियां भी बरामद कर ली गयी हैं.

डाक्टर सचान पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं. पुलिस अब हत्या के आरोप के सिलसिले में पूछताछ के लिए डाक्टर सचान को जेल से रिमांड पर लेना चाहती है.

डाक्टर बीपी सिंह की ह्त्या दो अप्रैल को सुबह की सैर के समय हुई थी. इससे कुछ महीने पहले उनके पूर्ववर्ती डॉक्टर विनोद आर्य की हत्या भी इसी तरह सुबह की सैर के समय हुई थी.

कैबिनेट सचिव के अनुसार जांच पड़ताल के दौरान उजागर हुआ है कि परिवार कल्याण विभाग में करोड़ों रुपए के बजट का दुरूपयोग और ग़बन हुआ है.

डॉक्टर बीपी सिंह ने इसका हिसाब माँगा और इसी के चलते उनकी हत्या हुई. कैबिनेट सचिव का कहना है कि शुक्रवार को पकड़े गए कथित हत्यारों ने इससे पहले की गई डॉक्टर आर्य की हत्या के संबंध में भी कुछ तथ्यों का खुलासा किया है.

लखनऊ पुलिस डॉक्टर आर्य की हत्या के सिलसिले में पहले ही कई लोगों को जेल भेज चुकी है.

लखनऊ पुलिस ने डॉक्टर बीपी सिंह हत्याकांड में भी पहले दूसरे अपराधियों पर इनाम घोषित किया था.

पत्रकारों ने इस अन्तर्विरोध पर कई सवाल पूछे, लेकिन कैबिनेट सचिव उनका उत्तर नहीं दे सके.

इस हत्याकांड से मुख्यमंत्री मायावती की बहुत किरकिरी हुई थी. विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथों लिया.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने आरोप लगया था कि ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए केंद्र से मिलने वाले अरबों रुपए की उत्तर प्रदेश में लूट हो रही है.

इन आरोपों के चलते स्वास्थ्य विभाग से जुड़े दो कैबिनेट मंत्रियों बाबू सिंह कुशवाहा और अनंत मिश्र को सरकार से त्यागपत्र देना पड़ा था.

पत्रकारों ने सवाल किया कि परिवार कल्याण विभाग में धन की लूट का हिस्सा ऊपर कहाँ तक जाता था और क्या इस हत्या में कोई मंत्री भी शामिल था, लेकिन कैबिनेट सचिव सारे सवाल टाल गए.

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