क़ैदी जेल से रिहा, उम्र 108 साल

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उत्तर प्रदेश की जेल में बंद रहे एक अनोखे क़ैदी को अब बाहर की हवा खाने का मौका मिल रहा है. ब्रिज बिहारी पांडे नाम के ये बंदी 108 साल के हैं और भारत में सबसे उम्रदराज़ क़ैदी थे.

ब्रिज बिहारी पांडे को चार लोगों के क़त्ल के लिए उम्र क़ैद की सज़ा हुई थी. 1987 में जब उन्होंने ये अपराध किया था तो वे 84 साल के थे.

गोरखपुर जेल के अधिकारियों का कहना है कि ब्रिज बिहारी पांडे को नियमित रूप से अस्पताल ले जाना पड़ता था और उन्हें मानवता के आधार पर रिहा किया गया है. वे चल नहीं सकते.

जेल अधिकारी एसके शर्मा कहते हैं कि 108 के क़ैदी के देखभाल करना मुश्किल हो रहा था और इसलिए कोर्ट में रिहाई की अर्ज़ी दाखिल की गई जिसे कोर्ट ने मान लिया.

एक हिंदू मंदिर में नए पुजारी की नियुक्ति को लेकर वर्ष 1987 में ब्रिज बिहार पांडे और 15 अन्य लोगों ने मिलकर चार लोगों की हत्या कर दी थी. इन लोगों में पांडे के परिवार वाले भी शामिल थे. ब्रिज बिहारी पांडे मंदिर में पुजारी का काम करते थे.

ये मुकदमा करीब दो दशक तक चला. वर्ष 2009 में जाकर पांडे को सज़ा सुनाई गई.

जब उन्हें जेल से बाहर ले जाया जा रहा था, ब्रिज बिहारी पांडे ने बाक़ी क़ैदियों को गले लगाया जिन्होंने उन्हें फूलों का हार पहनाया. जेल अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मुस्कुराते हुए हार को स्वीकार किया और कहा, “भगवान बहुत कृपालु हैं, शुक्रिया.”

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