नहीं बन पाई लोकपाल विधेयक पर सहमति

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लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की मंगलवार को हुई अंतिम और निर्णायक बैठक दिल्ली में एक बार फिर बिना किसी सहमति के ख़त्म हो गई है.

बैठक का एक दौर सोमवार को भी हुआ था जहाँ इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट कुछ कम होती नज़र आई, हालांकि कई मसलों पर अहसहमति बनी हुई है.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने बैठक के बाद कहा कि छह मुद्दों पर अभी भी असहमित बनी हुई है.

कपिल सिब्बल ने कहा, "कुछ बिंदुओं पर हम असहमत होने के लिए सहमत हो गए हैं."

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने समिति की नौंवी बैठक में मसौदों का आदान-प्रदान किया.

नागरिक समाज के समिति में प्रतिनिधि प्रशांत भूषण ने कहा कि वो अभी भी प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की अपनी मांग पर क़ायम हैं.

प्रशांत भूषण ने सरकारी मसौदे को बेहद निराशाजनक बताया है.

नार्थ ब्लाक में आयोजित इस बैठक में गाँधीवादी अन्ना हज़ारे की तरफ़ से ख़ुद हज़ारे, पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण, वकील प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश संतोष हेगड़े और सूचना के अधिकारों के लिए काम करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने लिया.

जबकि केंद्र सरकार की तरफ़ से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, कंपनी मामलों के मंत्री सलमान ख़ुर्शीद, क़ानून मंत्री विरप्पा मोईली इस बैठक में मौजूद थे.

हालांकि समिति के सरकार की ओर से एक और सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम इसमें शामिल नहीं हो पाए.

लोकपाल बिल के मसौदे को तीस जून तक तैयार कर लिया जाना है. इसके बाद मसौदे पर सर्वदलीय बैठक कराई जाएगी. ये विधेयक संसद के एक अगस्त से शुरू मॉनसून सत्र में पेश किया जाना है.

'निराशाजनक मसौदा'

प्रशांत भूषण ने कहा कि उनके पक्ष को पहली बार ये देखने का मौक़ा मिला कि सरकार ने किस तरह के लोकपाल के मॉडल का प्रस्ताव रखा है.

उन्होने सरकारी मसौदे को भ्रष्टाचार रोकने का मात्र प्रतीकात्मक क़दम बताया.

उन्होने कहा, "ये लोकपाल दरअसल एक राजनीतिक कमेटी द्वारा चुना जाएगा और जो राजनीतिक पार्टी सत्ता में रहेगी, वो पार्टी इस कमेटी पर हावी रहेगी."

देर शाम प्रधानमंत्री ने यूपीए गठबंधन के विभिन्न घटकों की बैठक बुलाई है जिसमें लोकपाल विधेयक के मसौदे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

बैठक के बाद स्पष्ट था कि दोनों पक्षों के बीच प्रधानमंत्री और उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों को लोकपाल की परिधि में लाने जैसे मुख्य विषयों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है.

उधर बैठक के बाद कपिल सिब्बल का कहना था कि नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि दो-तीन दिनों में सरकारी मसौदे पर अपनी राय देंगे. उसके बाद मसौदे को जुलाई में होने वाली विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ हो रही बैठक के समक्ष रखा जाएगा. बाद में मसौदे को कैबिनट के सामने पेश किया जाएगा.

सिब्बल ने कहा कि वायदे के मुताबिक़ बिल को पारित करने के लिए उसे संसद के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा.

नॉर्थ ब्लाक में आयोजित इस बैठक में गांधीवादी अन्ना हज़ारे, पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण, वकील प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश संतोष हेगड़े और सूचना के अधिकारों के लिए काम करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने हिस्सा लिया.

जबकि केंद्र सरकार की तरफ़ से वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, कंपनी मामलों के मंत्री सलमान ख़ुर्शीद, क़ानून मंत्री वीरप्पा मोईली इस बैठक में मौजूद थे.

हालांकि सरकार की ओर से समिति के एक और सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम इसमें शामिल नहीं हो पाए.

लोकपाल बिल के मसौदे को तीस जून तक तैयार कर लिया जाना है. इसके बाद मसौदे पर सर्वदलीय बैठक कराई जाएगी. ये विधेयक संसद के एक अगस्त से शुरु मॉनसून सत्र में पेश किया जाना है.

प्रमुख मुद्दे

बैठक के बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिबब्ल ने कहा कि, "कुछ बिंदुओं पर हम असहमत होने के लिए सहमत हो गए हैं ".

लेकिन दोनों पक्षों के बीच छह मुद्दों पर अब भी असहमित बनी हुई है.

समिति में नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि प्रशांत भूषण ने कहा कि वो अब भी प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने की अपनी मांग पर क़ायम हैं.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, "लोकपाल को चुनने के लिए 10-सदस्यीय पैनल होगा जिनमें से पाँच सत्ताधारी पक्ष के होंगे, और सात दूसरी पार्टियों के नुमांइदे होंगे. यानि ये सरकार के हाथ में रहेगा कि किसे लोकपाल के लिए नियुक्त करना है. उन्हें हटाने का अधिकार भी सरकार के हाथ में रहेगा. सीबीआई सरकार के शिकंजे में ही रहेगी ".

नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि सरकारी मसौदे में गुनाहगारों को सुनवाई के मौक़े दिए जाने से बेहद ख़फ़ा थे.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, "सीआरपीसी के इतिहास में ये शायद पहली बार होगा कि एफ़आईआर दर्ज करने से पहले आपको भ्रष्टाचारी की सुनवाई करनी पड़ेगी. जाँच पूरी हो जाने के बाद और मुक़दमा दायर करने के पहले भी लोकपाल को सुनवाई करनी पड़ेगी. ये कहीं नहीं होता है."

केजरीवाल के मुताबिक़ ऑडियो रेकार्डिंग देने की उनकी मांग पर सरकार ने विचार करने को कहा है.

लेकिन प्रशांत भूषण ने कहा कि ये कहना ग़लत होगा कि सरकार के साथ हो रही बैठकों में कोई प्रगति नहीं हुई है.

उन्होंने कहा, "सरकार का पिछला मसौदा बिल्कुल बेकार था. लेकिन सरकार ने माना है कि लोकपाल की संस्था को कुछ आज़ादी मिलनी चाहिए. मौजूदा मसौदा भी सिर्फ़ प्रतीकात्मक है और वो राष्ट्र को भ्रष्टाचार से लड़ने का तरीक़ा प्रदान नहीं करता."

याद रहे कि अन्ना हज़ारे ने कहा है कि अगर संसद 15 अगस्त तक लोकपाल बिल को पारित नहीं करती तो अगले दिन से वो फिर अनशन शुरू कर देंगे.

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