'नेता को भ्रष्ट कहनेवाले मैदान में आएं'

ममता बनर्जी
Image caption पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद ये ममता बनर्जी ने मंगलवार को दिल्ली में पहले पहली पत्रकारवार्ता की

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रधानमंत्री या न्यायधीशों को लोकपाल के दायरे में लाया जाता है या नहीं, लेकिन उन्हें लगता है कि किसी एक आदमी को लोकपाल के दायरे में लाने से भ्रष्टाचार का ख़ात्मा नहीं हो जाएगा.

तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद दिल्ली में पहली पत्रकार वार्ता करते हुए हर तरह से संकेत देने की कोशिश की कि अब वो पहले वाली ममता बनर्जी नहीं है.

वो बात-बात पर धरना नहीं देंगी, झगड़ा नहीं करेंगी और कोप भवन में नहीं जायेंगी. हर प्रश्न पर उत्तर उन्होंने घुमा फिरा कर दिए. लोकपाल बिल पर ममता का उत्तर ऐसा था जिससे लगा कि वो नागरिक समाज के आंदोलन को कोई बहुत तूल नहीं देना चाहतीं और केंद्र सरकार को भी नाराज़ नहीं करना चाहतीं. ममता बनर्जी ने कहा "अगर कोई ये कहे की देश के सारे नेता भ्रष्ट हैं और कोई एक ही आदमी ही ईमानदार है तो उनका स्वागत है. आ जाएं राजनीति में और सीधी लड़ाई लड़ें."

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा की उनकी सरकार इस मुद्दे पर बाद में अपने विचार केंद्र सरकार को भेजेगी लेकिन वो मानती हैं अन्ना हज़ारे को सरकार खूब सम्मान दे रही है.

बदले अंदाज़

हमेशा की तरह एक सस्ती से भूरी बॉर्डर की साड़ी पहने ममता ने कुछ चिंगारियां ज़रूर छोडीं जब उन्होंने कुछ पत्रकारों को झिड़का. कुछ के ऊपर वामपंथी समाचार माध्यम से जुड़े होने की टिपण्णी की लेकिन वो आग बबूला नहीं हुईं, एक भी वाक्य ऐसा नहीं बोला जिससे किसी क़िस्म का कोई विवाद खड़ा हो या जिसके बारे में उनसे बाद में सवाल पूछे जा सकें. अपने चिर राजनितिक शत्रु वामपंथी दलों की सरकार के दौरान हुए घोटालों पर भी उनकी टिप्पणियाँ सधी हुईं थीं.

बनर्जी ने कहा की उनकी सरकार को कई शिकायतें मिल रहीं हैं और राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा महालेखाकार से राज्य के खातों के विशेष लेखा परिक्षण के लिए आग्रह करगें. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की वित्तीय हालत पर एक श्वेत पत्र जारी करेगी. दिल्ली और उसके पत्रकारों को पिछले चंद रोज़ में ही भारत की दो बड़ी महिला नेताओं के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके बदले तेवर देखेने को मिले हैं.

पहले जयललिता अब ममता बनर्जी.

गुस्सैल और तुनक मिजाज़ बताई जानेवाली दोनों नेता पहले के विपरीत शायद नए सिरे से एक नई छवि गढ़ना चाहती हैं.

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