बलात्कार क़ानून में बदलाव होगा

मायावती
Image caption महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते आपराधिक घटनाओं के मद्देनज़र मायावती सरकार दबाव में है.

उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती ने घोषणा की है कि राज्य में महिलाओं के साथ बलात्कार और ह्त्या की लगातार बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए क़ानून में संशोधन कर उसे सख़्त बनाया जाएगा.

मंगलवार को लखनऊ में एक प्रेस वार्ता में बोलते हुए मायावती ने कहा कि दंड प्रकिया संहिता में बदलाव लाकर ऐसे अपराधों को ग़ैर-ज़मानती बनाया जाएगा, सज़ा सख़्त की जाएगी और ये सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे मामलों का फैसला छह महीने के भीतर हो जाए.

पिछले कुछ दिनों में राज्य में महिलाओं के ख़िलाफ़ लगातार एक के बाद एक बलात्कार और हत्या के मामले सामने आते रहे हैं.

दबाव

अगले साल राज्य में होने वाले विधान सभा चुनावों के मद्देनज़र विपक्षी राजनीतिक दल ऐसे मामलों को ज़ोर-शोर से उठा रहे हैं जिसकी वजह से मायावती सरकार भारी दबाव में है.

मायवती ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 में महिलाओं की इज्ज़त लूटने के इरादे से किया गया हमला अब उत्तर प्रदेश में गैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में होगा.

इसके अलावा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 235 में संशोधन करके अदालत पर ज़िम्मेदारी डाली जाएगी कि बलात्कार के मुक़दमे का निपटारा छह महीने के भीतर ख़त्म कर दिया जाए.

राज्य सरकार ने दंड प्रक्रिया कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश राज्यपाल को भेज दिया है.

लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि दंड प्रक्रिया संहिता केंद्रीय क़ानून है इसीलिए राज्यपाल इस अध्यादेश को केंद्र की मंजूरी के लिए भेजेंगे.

बैठक

प्रेस कांफ्रेंस के शुरू में मुख्यमंत्री ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ़ बढती हिंसा की घटनाओं पर दुख प्रकट किया और भरोसा दिलाया कि दोषियों को सज़ा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.

उन्होंने कहा, "मै प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध हुई कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करती हूँ और ऎसी बच्चियों और महिलाओं के साथ हुई आपराधिक घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनको तथा उनके परिवारजनों को यह आश्वासन दिलाना चाहती हूँ कि दोषियों के विरुद्ध मेरी सरकार सख़्त से सख़्त कारवाई करेगी."

मायावती ने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों, विशेषकर समाजवादी पार्टी के शासनकाल में महिलाओं, अल्पसंख्यकों, पिछड़े और कमजोर वर्गों के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कारवाई नहीं होती थी.

उन्होंने बताया कि 27 जून को इस मामले पर चर्चा के लिए लखनऊ में प्रदेश भर के सभी बड़े अफसरों की बैठक बुलायी गई है.

उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में 'चरित्रहीन लोगों' के ख़िलाफ़ एक विशेष अभियान चलाया जाएगा.

कुछ लोग कह रहे हैं कि मायावती नए क़ानून का सहारा लेकर राज्य पुलिस की नाकामी को न्यायपालिका पर डालने की कोशिश कर रही हैं.

विपक्ष का मोर्चा

लेकिन विपक्ष मुख्यमंत्री के आश्वासन और कार्यवाही से संतुष्ट नही है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी ने बस्ती का दौरा कर बलात्कार की शिकार एक महिला से भेंट की.

डाक्टर जोशी ने कहा कि मायावती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि प्रदेश की मुख्यमंत्री सत्ता में बने रहने का अपना नैतिक अधिकार खो चुकीं हैं.

कांग्रेस सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि वह प्रदेश में महिलाओं और अबोध नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कार एवं हत्या के मामले को मानसून सत्र में संसद में पूरी जोरदारी के साथ उठाएंगे.

साफ़ है कि विपक्षी दल इस मामले में मायावती के साथ कोई नरमी बरतने के पक्ष में नही लग रहे हैं.

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