'सरकारी बिल में आम आदमी के लिए कुछ नहीं'

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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि 16 अगस्त से शुरू हो रहे आमरण अनशन से वो तब तक नहीं उठेंगे जब तक सरकार लोकपाल बिल पर नागरिक समाज की पूरी बात नहीं मान लेती.

उन्होंने कहा है कि आज के दिन पाकिस्तान से भी ज़्यादा ख़तरा साठ-गांठ से चल रहे भ्रष्टाचार से है.

सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए नागरिक समाज की ओर से किरण बेदी ने कहा है कि सरकार जिस तरह का लोकपाल बिल लाने जा रही है वो एक छलावा भर है.

वहीं अन्ना के दूसरे सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि सरकार के बिल में सिर्फ़ 65,000 केंद्रीय सरकारी कर्मचारी लोकपाल के अंतर्गत आएंगे जबकि ग़ैर-सरकारी संगठनों या एनजीओ के 15 से 20 लाख लोग इसके दायरे में आ जाएंगे.

अन्ना का कहना था कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति उदासीन है और वो भ्रष्टाचार मुक्त भारत के ख़िलाफ़ नज़र आती है.

उन्होंने कहा, “मैं 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर फिर से आंदोलन शुरू करूंगा और जब तक शरीर में प्राण है, ये आंदोलन जारी रहेगा,”

उन्होंने कहा कि पिछली बार सरकारी प्रतिनिधियों के कहने पर उन्होंने अनशन तोड़ दिया था लेकिन इस बार सरकार जब तक पूरी बात नहीं मान लेती वो अनशन से नहीं उठेंगे.

उन्होंने कहा, “अब हमारा विश्वास (सरकार पर) नहीं रहा.”

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Image caption पिछली बार अन्ना के समर्थन में काफ़ी लोग जुटे थे. अन्ना का कहना है कि इस बार उससे कहीं बड़ा आंदोलन होगा.

किरण बेदी ने सरकार की ओर से लाए जा रहे प्रस्ताव को एक छलावा करार करते हुए कहा कि इसमें आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है.

उन्होंने कहा कि नागरिक समाज ने ज़िला स्तर पर, राज्य स्तर पर लोकपाल अधिकारी की नियुक्ति की मांग की थी जिससे आम आदमी अपनी शिकायत ले कर जा सके. लेकिन सरकार के बिल में इसे नहीं रखा गया है.

नागरिक समाज ने सतकर्ता आयोग और सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी शाखा को लोगपाल के अंदर लाने का सुझाव दिया था लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया.

इसके अलावा उनका कहना था कि लोकपाल के पास आनेवाली जांच प्रक्रिया को इतना लंबा कर दिया गया है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाएगी.

अन्ना हज़ारे ने ये भी कहा कि लोकपाल के दायरे में उप-सचिव और उनसे ऊपर के अधिकारी ही आएंगे.

इससे आम आदमी का भला नहीं हो पाएगा क्योंकि उसे छोटे स्तर के कर्मचारियों से जूझना पड़ता है.

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