मरांडी के बेटे की हत्या मामले में फ़ैसला

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Image caption बाबूबाल मरांडी के पुत्र की हत्या माओवादियों के हमले में हुई थी.

झारखंड के गिरिडीह जि़ले की एक अदालत नें वर्ष 2007 में हुए एक नरसंहार के सिलसिले में चार कथित माओवादी नेताओं को मौत की सजा सुनाई है.

इस हमले में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र सहित कुल 20 लोग मारे गए थे.

इससे पहले अदालत नें इन सभी चार अभियुक्तों को दोषी करार दिया था. मामले के कुल दस अभियुक्त थे जिनमे से 6 को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है.

गिरिडीह के प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंद्रदेव मिश्र की अदालत नें ब्रहस्पतिवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया तो सभी अभियुक्तों के परिजन अदालत में मौजूद थे.

फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर निकलकर अभियुक्तों नें नारेबाजी की और कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

जमशेदपुर लोक सभा सीट के लिए हो रहे उप चुनाव के लिए प्रचार कर रहे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखण्ड विकास मोर्चा के नेता बाबूलाल मरांडी नें कहा कि अदालत का फैसला "काफी कठोर" है. उन्होंने सभी अभियुक्तों को माफ़ी देने की वकालत की है.

बाबूलाल मरांडी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी नें पलटवार करते हुए कहा कि उनका बयान राजनीति से प्रेरित है.

संगठन का कहना है कि मरांडी इस तरह का बयान देकर जमशेदपुर लोक सभा उपचुनाव में फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

सामूहिक हत्या

वर्ष 2007 को 27 अक्तूबर की रात गिरिडीह जिले के चिलकारी इलाके में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था.

इस कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी के भाई नूनूलाल मरांडी और पुत्र अनूप मरांडी भी मौजूद थे.

तभी माओवादियों के एक हथियारबंद दस्ते नें आयोजन स्थल पर धावा बोल दिया था. वह नूनूलाल मरांडी को ढूंढ रहे थे.

हलाकि नूनूलाल मारनी भागने में कामयाब रहे मगर माओवादियों नें वहां मौजूद लोगों पर अंधाधुन्द गोलियां चलानी शुरू कर दी.

हमले में बाबूलाल के पुत्र अनूप के घटना स्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि उनके साथ 19 और ग्रामीण मारे गए थे.

जिन अभियुक्तों को सजा सुनाई गयी उनमे छत्रपति मंडल जीतन मरांडी, अनिल और मनोज शामिल हैं.

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