हिंसा का असर बस्तर की अर्थव्यवस्था पर

बस्तर में हाट

छोटे छोटे साप्ताहिक हाट और बाज़ार छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल की जीवन रेखा हैं.

ख़ास तौर पर राज्य के बस्तर संभाग के जंगली इलाक़ों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इन्हीं हाट और बाज़ारों पर निर्भर है. मगर इस इलाक़े में जारी हिंसा का असर यहां के साप्ताहिक बाज़ारों पर पड़ा है. कभी यह हाट अपनी चहल पहल के लिए जाने जाते थे. आज इनपर संगीनों का साया मंडरा रहा है.

यह सिर्फ हाट ही नहीं हैं बल्कि यह बस्तर के आदिवासियों की संस्कृति का भी एक अहम केंद्र हैं. हफ्ते में एक बार लगने वाले इन हाटों की तैयारी पूरे हफ्ते चलती है. सैकड़ों किलोमीटर का सफ़र पैदल तय कर आदिवासी इन बाज़ारों में आते हैं.

कुछ अपनी चीज़ें बेचते हैं. कुछ नई चीज़ें ख़रीदते हैं और थोडा मनोरंजन भी करते हैं. थोडा सा नाच गाना, थोड़ी सी शराब और अपनों से मेल मिलाप. इन हाटों नें कुछ इस तरह पिरोया है यहां के लोगों की ज़िंदगियों को.

आज बस्तर के बदलते हालात का असर ना सिर्फ़ आदिवासियों की इस सांस्कृतिक धरोहर पर पड़ा है बल्कि यहां जारी हिंसा ने इस इलाक़े की अर्थव्यवस्था को ही तोड़ मरोड़ कर रख दिया है.

जानकारों का कहना है कि पहले हाट बाज़ारों में ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ता था. आज बस गिने चुने लोग ही बाज़ार आते हैं. वह भी जो लोग राष्ट्रीय या राज्य के उच्च मार्गों के पास रहते हैं. सूदूर इलाक़ों से अब बाज़ारों में लोगों का आना बंद ही हो गया है.

सूदूर और दुर्गम इलाक़ों से आने वालों पर जहां पुलिस की नज़र है वहीं बाज़ारों में आने वालों को माओवादी भी शक की निगाहों से देख रहे हैं.

चूंकि सूदूर इलाक़ों में माओवादियों का ख़ासा प्रभाव है, इन इलाक़ों से आने वाले ग्रामीणों को पुलिस की तलाशी के दौर से दो चार होना पड़ता है.पुलिस के सवालों की लम्बी फहरिस्त के आगे सीधे साधे आदिवासी निरोत्तर नज़र आते हैं.

Image caption बस्तर में हाट के बहान लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं.

वहीं माओवादियों ने भी हाट बाज़ारों पर कई हमले किए हैं और कई लोगों की हत्या की है.

'अर्थव्यवस्था'

बस्तर में जारी हिंसा के दौर नें अब यहां की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित किया है.

बस्तर के चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष किशोर परख कहते हैं कि अब इन हाट बाज़ारों में ना आदिवासी आते हैं ना ही व्यापारी.

परख कहते हैं, "पहले आदिवासी महुआ, चिरौंजी और दूसरे जंगली उपजों को लेकर हाट बाज़ारों में आया करते थे. यहां व्यापारी भी मौजूद रहते थे. एक तरह की अदला बदली की व्यवस्था काम करती थी.मसलन आदिवासी चिरौंजी और महुआ के बदले कपड़े, गहने ले जाया करते थे. या फिर अपने उपजों को बेचकर पैसे ले जाते थे.अब हिंसा के डर से व्यापारियों ने हाट बाज़ारों से ख़ुद को अलग कर लिया है."

परख का कहना है कि अब ग्रामीणों को हाट बाजारों की बजाए मीलों लम्बा सफ़र तय कर शहरों तक अपने उपज को बेचने आना पड़ता है जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है.

शनिवार को दंतेवाड़ा के पास बास्तानार में साप्ताहिक हाट लगता आ रहा है.

यहां मोजूद लोगों का कहना है कि पिछले दिनों तक यहा ख़ूब गहमा गहमी रहती थी. मगर अब यह हाट सिमट गया है. हाट में मेरे साथ मौजूद स्थानीय पत्रकार राज कुमार तिवारी ने मुझे ख़ाली पड़े इलाक़ों को दिखाते हुए बताया कि यह हाट कितनी दूर तक फैला हुआ था.

तिवारी कहते हैं, "लगभग आधा किलोमीटर तक के क्षेत्रफल में यह हाट लगा करता था. मगर जबसे हिंसा बढ़ी, यह सिकुड़ कर थोड़ी सी जगह में सीमित हो गया है. अब यहां ना ग्रामीण उतनी तादाद में आते हैं ना व्यापारी. पिछले लम्बे अरसे से हाट बाज़ारों पर हमले हुए हैं. ग्रामीण इलाक़ों में हिंसा बढ़ी है.अब लोग यहां नहीं आते हैं."

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Image caption बस्तर के हाट उनकी पूरी संस्कृति को दिखाते हैं.

हाट में मौजूद लोग बताते हैं कि किस तरह आदिवासी लड़के लड़कियां सज धज कर बाज़ार आया करते थे. यहां मेल मिलाप होता था. दूर दराज़ के ग्रामीणों की मुलाक़ात हाट के बहाने अपने रिश्तेदारों से हुआ करती थी. पेड़ों के नीचे बैठकर सल्फी की चुस्कियों के साथ वह एक दूसरे का हाल चाल जानते थे.फिर शाम ढलते ही अपने अपने घरों के लिए निकल पड़ते थे. अब यह सबकुछ नदारद है.

आदिवासी अंचल में दशकों से इन हाट बाज़ारों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है पारंपरिक मुर्गे़ की लड़ाई का खेल. दूर दराज़ गावों से लोग अपने लड़ाकू मुर्ग़ों को लेकर बाज़ार आते हैं. यह लड़ाई दो योद्धाओं के बीच होती है और इनपर भीड़ में मौजूद सब ही बोली लगाते हैं.

यह युद्ध चंद पलों का है. इस रण में एक जीतेगा तो दूसरा हारेगा. फिर सभी अपने अपने घरों को लौट जाएंगे. जिसका मुर्ग़ा जीता और जिसका हारा - दोनों ही साथ मिलकर भोज का आनंद लेंगे. मगर बस्तर में सरकार और माओवादियों के बीच चल रही लड़ाई ने आदिवासी अंचल की इस पारंपरिक मुर्ग़े की लड़ाई पर भी अपना असर डाल दिया है.

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