लुटेरों से छूटे भारतीय नाविक दिल्ली पहुंचे

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सोमालियाई लुटेरों के चंगुल से छुड़ाए गए 22 लोगों में शामिल छह भारतीय शुक्रवार को 10 महीने बाद अपने देश वापस लौटे.

सभी छह भारतीय शुक्रवार सुबह दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे.

छह भारतीयों में जम्मू के एनके शर्मा, अंबाला के सतनाम सिंह, रोहतक के रविंद्र गुलिया, शिमला के प्रशांत चौहान, मुंबई के सचिन और कन्याकुमारी के बिजू शामिल हैं.

हवाई अड्डे पर लगभग एक घंटे से भी ज़्यादा समय तक सुरक्षा जांच के लिए उन्हें अंदर रहना पड़ा और ये एक-एक पल बाहर इंतज़ार कर रहे परिवार वालों के लिए भारी गुज़र रहा था.

लेकिन जैसे ही भारतीय नाविक हवाई अड्डे से बाहर निकले पूरा माहौल बदल गया. रिश्तेदारों के अलावा वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए.

परिवार वाले उनसे गले मिलकर रोने लगे, उन्हें फूल माला पहनाए गए.

छह नाविकों में से एक रविंद्र गुलिया ने बंधक रहने के समय अपनी पीड़ा की जानकारी दी लेकिन उससे भी ज़्यादा दुखी वो भारत सरकार के रवैये से थे.

ये पूछे जाने पर कि अब जबकि आप सही सलामत घर लौट आए हैं क्या आप भारत सरकार से कुछ कहना चाहते हैं, इस पर उनका जवाब था, ''हमलोग कह कह कर थक चुके हैं,अब सरकार से कहने के लिए कुछ नहीं बचा.''

Image caption पाकिस्तान के कैप्टन वसी भी इन बंधकों में से एक थे.

रविंद्र गुलिया की पत्नी संपा भी बहुत भावुक हो गई थीं. संपा ने रोते हुए कहा कि मेरे पति के वापस लौटने पर मुझे ख़ुशी है लेकिन और दूसरे भारतीयों के अभी तक बंधक रहने पर उन्हें बहुत दुख है.

एक और नाविक एनके शर्मा ने कहा, ''पाकिस्तान सरकार ने बिना किसी की राष्ट्रीयता का भेदभाव किए हुए सभी 22 बंधकों को छुड़ाने के लिए जो किया है वो तारीफ़ के क़ाबिल है.''

एक और नाविक प्रशांत चौहान ने सरकार के रवैये पर कटाक्ष करते हुए कहा, ''मैं भारत सरकार से कहना चाहता हूं कि हमलोग तो दूसरों की मदद से जैसे तैसे घर आ गए लेकिन आप कम से कम दूसरे भारतीय बंधकों को छुड़ाने के लिए कुछ करें.''

दिल्ली हवाई अड्डे पर छुड़ाए गए लोगों के रिश्तेदारों के अलावा भारी तादाद में उनके दोस्त और पड़ोसी भी मौजूद थे. भारी संख्या में मीडियाकर्मियों भी वहां थे.

वहां मौजूद कई लोगों के हाथों में तख्तियां थी जिनमे पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी का शुक्रिया अदा किया.

लेकिन एक तरफ़ जहां नाविकों के संबंधियों ने अंसार बर्नी का शुक्रिया अदा किया वहीं भारत सरकार की जमकर आलोचना की.

एक नाविक रविंद्र गुलिया की पत्नी संपा ने कहा कि भारत सरकार ने जिस तरह से उनलोगों के दुख दर्द की अनदेखी की थी वह सचमुच डराने वाला है.

एक दूसरे बंधक सतनाम सिंह की मां सुरिंद्र कौर ने कहा, ''हम तो उम्मीद ही छोड़ चुके थे कि मेरा बच्चा वापस आएगा लेकिन अंसार बर्नी हमारे लिए 'गुरू' बनकर आए और हमारी सहायता की.''

सतनाम सिंह के पिता शमशेर सिंह ने कहा कि वे प्रधानमंत्री से लेकर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज तक और सेना प्रमुख से लेकर हर अधिकारी के दरवाज़े पर गए लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की.

उन्होंने कहा कि मदद तो दूर कईयों ने तो उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया.

एक और बंधक प्रशांत चौहान की मां ने कहा कि उनके परिवार ने पिछले दस महीने नरक की ज़िदगी गुज़ारी है और वह लोग इसे एक बुरा सपना समझकर भुलाने की कोशिश करेंगे.

भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने एक बयान जारी कर पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया.

उन्होंने लोगों को वापस लाने वाली पाक नेवी की तारीफ़ करते हुए कहा, ''नाविक की घर वापसी पर मैं राहत महसूस कर रहा हूं. हम पाकिस्तानी नेवी के समय पर की गई मदद की सराहना करते हैं.''

कराची

इससे पहले सोमालियाई लुटेरों के चंगुल से छुड़ाए गए 22 लोगों को लेकर पाकिस्तानी नौसेना का युद्धपोत पीएनएस ज़ुल्फ़िक़ार क़डी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बृहस्पतिवार को कराची की बंदरगाह पहुंचा जहां नाविकों का भव्य स्वागत किया गया.

पाकिस्तानी अधिकारियों ने छह भारतीय नाविकों को कराची में भारतीय अधिकारियों के हवाले किया.

पीएनएस ज़ुल्फ़िक़ार में आए नाविकों में चार पाकिस्तानी, 11 मिस्री, छह भारतीय और एक श्रीलंकाई नागरिक थे.

ग़ौरतलब है कि यह नाविक मिस्र के एक मालवाहक जहाज़ एमवी स्वेज़ में सवार थे जिसका क़रीब 10 महीने पहले पिछले साल अगस्ता में सोमाली लुटेरों ने अपहरण कर लिया था.

जहाज़ पर सवार नाविकों को छोड़ने के लिए अपहरणकर्ताओं ने 40 लाख डॉलर की मांग की थी.

ख़बरों के मुताबिक़ फिरौती का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी की ट्रस्ट के ज़रिए दिया गया था.

इसके बाद ही सोमाली लुटेरे नाविकों को छोड़ने के लिए राज़ी हुए थे, और पिछले हफ़्ते उन्हें छोड़ दिया था.

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