जातिरहित समाज के लिए 'नो सरनेम'

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Image caption पुलिस महानिदेश दलजीत सिंह के मुताबिक उनके इस आदेश का स्वागत हुआ है.

हिमाचल प्रदेश में पुलिसकर्मी सरकारी पत्राचार और संवाद में अपने सरनेम (कुलनाम) का ज़िक्र नहीं कर रहे हैं.

राज्य के पुलिस महानिदेशक दलजीत सिंह मिन्हाज़ की पिछले 14 जून को जारी किए गई इस ‘सलाह’ के बाद दफ़्तरों के बाहर तख़्तियाँ बदल दी गई हैं. ये ‘सलाह’ हिमाचल प्रदेश पुलिस सर्विस के सभी कर्मियों पर लागू होंगी.

यानि दलजीत सिंह मिन्हाज़ के दफ़्तर के बाहर तख़्ती पर मात्र दलजीत सिंह लिखा है.

दलजीत सिंह कहते हैं कि व्यक्ति के सरनेम से उसकी जाति, धर्म, प्रादेशिक पृष्ठभूमि आदि का पता चलता है, लेकिन ये कदम जाति-रहित समाज बनाने की ओर एक कदम है. हालाँकि दलजीत ये भी कहते हैं कि हिमाचल में जाति की समस्या नहीं है.

वो कहते हैं, ‘पुलिस में सभी के पास समान आधार होना चाहिए. ऐसा क्यों हो कि पुलिस मे लोग अपनी अलग-अलग पहचान के साथ रहें?’

लेकिन ऐसे भी सवाल उठे कि क्या हो अगर दो व्यक्तियों के एक ही नाम हो, तो उनके बीच फ़र्क कैसे किया जाएगा?

दलजीत सिंह कहते हैं, ‘लेकिन उनके पद तो अलग होंगे. हिमाचल प्रदेश में मुझे ये पता नहीं है कि कहाँ एक ही नाम के दो व्यक्ति होंगे.’

दलजीत के मुताबिक लोग पुलिस अफ़सरों को उनके पद से ये ही याद रखते हैं, ना कि उनके नाम से.

स्वागत

दलजीत बताते हैं कि उनके इस आदेश का स्वागत किया गया है.

तो क्या इसके लिए उन्हें राज्य सरकार का समर्थन प्राप्त है?

‘इसमें राज्य सरकार कहाँ से आ जाती है? ये कोई नीतिगत फ़ैसला नहीं है. ये हिमाचल पुलिस का निर्देश है.’

लेकिन इस मामले में थोड़ी पेचीदगी भी है. क्या हो अगर एक से ज़्यादा लोगों के नाम और पद एक ही हों?

दलजीत बताते हैं, ‘हमारे यहाँ विनोद कुमार नाम से तीन डीएसपी हैं. हम अपने पत्राचार में उन्हें उनकी वरिष्ठता के मुताबिक विनोद 1, विनोद 2 और विनोद 3 नाम से पुकारते हैं. ये लोग खुद ही अपने सरनेम का इस्तेमाल नहीं करते थे.’

लेकिन बात यहाँ ही ख़त्म नहीं होती, अगर दो लोगों में फ़र्क करने का कोई और तरीका नहीं है, तो फिर उनके पिता के नाम से उनमें फ़र्क किया जाएगा. उनके पिता के नाम तो अलग होंगे.

ज़्यादा वक्त नहीं हुआ जब हिमाचल पुलिस ने अपनी वर्दी को ख़ाकी से नीले में बदल दिया था क्योंकि राष्ट्रीय पुलिस कमिशन की सिफ़ारिशों के मुताबिक ख़ाकी वर्दी लोगों को अंग्रेज़ों की याद दिलाती है जिन्होंने भारतियों पर अत्याचार किए थे.

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