नमक की कमी समुद्र के पानी से पूरी की

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(सोमाली लुटेरों के बंधन से छूटे छह भारतीय शुक्रवार को अपने घर पहुंच गए. इन्हीं छह में शामिल थे रविंद्र गुलिया जो अपने घर रोहतक पहुंच चुके है.

10 महीनों तक सोमाली लुटेरों की कैद में रहे रविंद्र गुलिया ने अपने अनुभवों को बीबीसी के साथ बांटा.)

जो दस महीने मैंने वहां बिताए है वह बेहद ही कष्टदायक थे जिसे बयान करना बहुत मुशिकल था.

हमें खाने के लिए चावल और स्पगेटी दी जाती थी और सब्ज़ी में आलू का रस दिया जाता था जो केवल गर्म पानी के अलावा कुछ नहीं होता था.

इसमें कोई मसाला नहीं होता था और खाने में नमक की कमी पूरी करने के लिए हम उसमें समुद्र का पानी मिलाना पड़ता था.

पीने के लिए कभी हमें एक या आधी बोतल पानी के लिए दी जाती था जो तीन लोगों को बांटनी पड़ती थी.

हमें पानी में कभी डीज़ल तो कभी पेट्रोल मिलाकर दिया जाता था. हमें सुमुद्र के पानी से ही नहाना पड़ता था.

हमारे हाथ बांध कर रखे जाते थे और जो उनके हाथ में जो आता था उससे या फिर बंदूक से हमें मारते रहते थे.

हम लोग ये उम्मीद छोड़ चुके थे कि कभी हम अपने परिवार से मिल पाएंगे. हमें लगता था कि मौत अब हमारे क़रीब आ रही है.

फरवरी में मेरी पत्नि से मेरी लागातार बात शुरू हुई और वह मुझे हर बार यही दिलासा देती थी कि वह प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, सुष्मा स्वराज और राहुल गांधी से मुलाकात कर रही है. हमें उम्मीद थी कि सरकार हमारे लिए कुछ करेगी लेकिन हमारे हाथ मायूसी ही लगी.

हम एक दूसरे को यही तसल्ली देते थे हम छूट जाएंगे.

हम शुक्रगुज़ार है अनसार बर्नी के ट्रस्ट, पाकिस्तान सरकार और भारत की जनता के जिसकी वज़ह से हमारी रिहाई संभव हुई.

मैं सरकार से नाराज़ हुँ कि उन्होंने हमें छुड़ाने के लिए कुछ नहीं कहा और न किया और ये नराज़गी बरकरार रहेगी.

(रविंद्र गुलिया ने ये बातचीत बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से की)

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