कांग्रेस 'न्याय मार्च' को मनाही

लखनऊ

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने राज्य में बढ़ते कथित आपराधिक गतिविधियों के विरोध में कांग्रेस पार्टी की लखनऊ में प्रस्तावित न्याय मार्च को अनुमति देने से मना कर दिया है.

सोमवार को प्रस्तावित रैली के एक दिन पहले स्थानीय प्रशासन ने शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने ज़िलाधिकारी अनिल कुमार सागर के हवाले से कहा है कि रैली से शहर की शांति व्यवस्था भंग होने का ख़तरा था.

अनिल कुमार सागर ने कहा है कि प्रस्तावित मार्च से यातायात में बाधा उत्पन्न होगी जिससे नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा.

उन्होंने कहा है कि शहर में पहले से ही निषेधाज्ञा लागू है.

'फ़ासीवादी सरकार'

कांग्रेस ने कहा है कि ये इस बात को साबित करता है कि मायावती सरकार किस तरह की 'फ़ासीवादी' तौर तरीक़ो से काम कर रही है.

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगणा जोशी ने कहा है, "हमें बीएसपी हुकुमत से इस फैसले की उम्मीद नहीं थी क्योंकि हमारा कार्यक्रम शांतिपूर्ण था. ये हास्यास्पद है कि राज्य सरकार किस तरह से काम कर रही है. ये फ़ासीवादी तौर तरीक़ा हैं."

रीता बहुगणा जोशी ने कहा कि कांग्रेस ने अपने पहले के कार्यक्रमों के शांतिपूर्ण ढ़ंग से समपन्न होने के आधार पर रैली निकालने के लिए दुबारा आवेदन दिया है.

उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने मार्च की आज्ञा नहीं दी तो कांग्रेस पार्टी सोमवार को बाल संग्रहालय मैदान में कार्यक्रम आयोजित करेगी.

कांग्रेस पार्टी ने पहले सोमवार की सुबह बाल संग्रहालय मैदान से एक रैली निकालने की घोषणा की थी.

कांग्रेस ने ये कार्यक्रम राज्य में हाल में सामने आए बलात्कार, हत्या और दूसरे आपराधिक मामलों को उजागर करने के लिए आयोजित किया था.

इन आपराधिक मामलों के सामने आने के बाद राज्य की मायावती सरकार भारी राजनीतिक दबाव में है.

Image caption रीता बहुगणा जोशी ने मायावती सरकार को फ़ासीवादी बताया है.

रा्ज्य में अगले साल विधान सभा के चुनाव होने हैं.

'राजनीतिक रंग'

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मायावती सरकार अपराधियों को शरण दे रही है.

उन्होंने कहा कि अब साफ़ हो गया है कि उप चीफ़ मेडिकल अफसर वाईएस सच्चन स्वास्थ्य अधिकारी आर्य और बीपी सिंह की हत्या में शामिल नहीं थे.

दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस अब ये लड़ाई अदालत, विधान सभा और सड़कों पर लडे़गी.

ह्त्या के संदेह में गिरफ़्तार वाईएस सच्चन की मौत लखनऊ जेल में संदेहास्पद परिस्थतियों में हो गई थी.

इस बीच राज्य की मुख्य मंत्री मायावती ने कहा है कि विपक्ष राज्य में होनेवाली छोटी मोटी घटनाओं को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है.

मुंबई के गोरेगांव में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया में मौजूद "कुछ जातिवादी ताक़तें" इन मामलों की ग़लत तस्वीर पेश कर रहे हैं.

मायावती ने कहा, "लेकिन मैं साफ़ कर देना चाहती हूँ कि मैं इस तरह के दबावों में नहीं आऊंगीं."

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