पहले कूड़े का ट्रक, फिर ख़राब ऐम्बूलेंस

Image caption अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि किरंदुल नगर पालिका का यह वाहन कचरा ढोने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मारे गए पुलिस के जवानों के शवों को कचरे की गाड़ी में ढोए जाने की तीखी आलोचना के बीच उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि शवों को घर ले जाते समय उन्हें ऐम्बुलेंस ख़राब होने की वजह से छह घंटे सड़क पर खड़ा रहना पड़ा.

रविवार की रात दंतेवाड़ा के किरंदुल इलाके में हुए बारूदी सुरंग के विस्फोट में चार पुलिसकर्मी मारे गए थे. इनमें गंभीर रूप से घायल किरंदुल थाना के प्रभारी डी एल नागवंशी की अस्पताल जाते समय मौत हो गई और तीन अन्य जवानों - भूषण मंडावी, असलान एक्का और लक्ष्मण भगत के शवों को दंतेवाड़ा नगपालिका की गाड़ी में ही लाया गया.

मारे गए जवानों के शवों के साथ सिर्फ इतना ही नहीं हुआ, जिस एम्बुलेंस से इन शवों को उनके पैत्रिक आवास भेजा जा रहा था वह भी बीच रास्ते में खराब हो गई. मारे गए जवानों में से असलान एक्का और लक्ष्मण भगत के शवों को रायगढ़ में उनके पैत्रिक गाँव ले जाया जा रहा था.

जवानों के परिजनों का आरोप है कि वाहन ख़राब होने के बाद वह पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे मगर किसी ने उनकी एक ना सुनी. लगभग छह घंटों तक उन्हें शवों के साथ बीच सड़क पर ख़राब वाहन में ही बैठे रहना पड़ा.

सरकार की आलोचना

यह प्रकरण ऐसे समय हुआ है जब केंद्र और राज्य सरकार नक्सल विरोधी अभियान के तहत करोड़ों रूपए खर्च कर रही है.

इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की विधान सभा में विपक्ष के नेता रविन्द्र चौबे नें आरोप लगाया है कि, पुलिस आधुनिकीकरण और नक्सल विरोधी अभियान के तहत केंद्र से मिलने वाले धन का उपयोग, राज्य सरकार साज सज्जा में और अपने अधिकारियों के ठाट बाट पर कर रही है.

बीबीसी से बात करते हुए चौबे ने कहा, "यह विडम्बना नहीं तो क्या है कि जीते जी जवानों को तो वाहन नसीब नहीं होते हैं. मरने के बाद भी उनके शवों को कूड़े के ट्रक में लाया जाता है. इससे ज़्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है."

चौबे ने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यालय में बैठे बड़े अधिकारी और ज़िले में तैनात अधिकारियों में तालमेल का अभाव है.

उपल्बध थी ऐम्बुलेंस?

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जवानों के शवों को नगरपालिका के वाहन में दंतेवाड़ा ज़िला मुख्यालय में उस जगह तक ले जाया गया जहाँ पर पुलिस के बड़े अधिकारी और जवान कतारबद्ध होकर अपने इन साथियों को श्रद्धांजलि दे रहे थे.

अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि किरंदुल नगर पालिका का यह वाहन कचरा ढोने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, मगर स्थानीय टीवी चैनलों पर यह तस्वीरें प्रसारित होने के बाद सरकार को काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

इस बाबत राज्य के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन ने एक समाचार एजेंसी को बताया कि क्योंकि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं थी इसलिए किरंदुल नगरपालिका के वाहन से तीन जवानों के शवों को दंतेवाड़ा लाया गया था.

उनका कहना है कि उस वक़्त किरंदुल में सिर्फ नगरपालिका का वाहन ही उपलब्ध था और उस वाहन को अच्छी तरह धोया और पोछा गया था.

पुलिस का कहना है कि किरंदुल में कोई वाहन उपलब्ध नहीं था. मगर जिस जगह बारूदी सुरंग का धमाका हुआ वह जगह निजी खनन कंपनी एस्सार के मुख्य द्वार के ठीक सामने है.

इसके अलावा घटना स्थल के पास बचेली में सरकारी उपक्रम नेश्नल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) की खदानें भी हैं जहां कंपनी की अपनी एम्बुलेंस उपलब्ध हैं.

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