किशोरी हत्या केस में एसपी निलंबित

Image caption मायावती सरकार इस मामले में घिरी नज़र आई है.

लखीमपुरखीरी में पुलिस थाने के अंदर एक किशोरी की ह्त्या के मामले में चारों तरफ से घिरने के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने ज़िले के पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर दिया है.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनकी सरकार को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने पर एतराज़ नही है , पर साथ ही आशंका जताई कि कहीं आरुषि हत्याकांड की तरह यह मामला भी दब कर न रह जाए.

समझा जाता है मामला हाईकोर्ट तक पहुँचने के कारण माया सरकार ने यह कार्रवाई की है.

उत्तर प्रदेश सरकार इससे पहले पोस्टमॉर्टम करने वाले तीन डाक्टरों को निलंबित कर चुकी है और थाने के एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर चुकी है.

लेकिन परिवार वाले और विपक्षी दल संतुष्ट नहीं हैं.

विपक्ष ने राज्य में बढते अपराधों पर विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.

बुधवार सुबह पत्रकारों को संबोधित करते हुए मायावती ने किशोरी सोनम की ह्त्या की निंदा करते हुए कहा, '' इस हत्याकांड में जो भी दोषी होंगे हमारी सरकार उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा दिलाएगी.''

सीबीआई जांच

Image caption सरकार का कहना है कि पोस्टमॉर्टम में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है.

राज्य सरकार ने हत्याकांड की जांच सीआईडी को सौंप दी है, लेकिन सोनम के मां-बाप सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं और विपक्षी दल इसका समर्थन कर रहे हैं.

मायावती ने कहा कि, “यदि परिवारजन इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराना चाहते हैं तो हमारी सरकार को कोई एतराज नही होगा. हमारी सरकार को केवल यही डर है कि नोएडा के आरुषि हत्याकांड की तरह कही यह मामला भी खुर्दबुर्द न हो जाए.''

घटना के पांच दिनों बाद भी उत्तर प्रदेश पुलिस या सीआईडी अभी तक इस बात का खुलासा नहीं कर पाई है कि आखिर सोनम की ह्त्या किसने की.

थाणे के रसोईए को सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है और थाणे के 11 पुलिस कर्मचारी निलंबित किए गए हैं.

सोनम के परिवार वालों का आरोप है कि उनकी बेटी अपने छोटे भाई के साथ भैंस चराने गई थी. उनका आरोप है कि पुलिस के लोग उसे अंदर घसीट ले गए और भाई को भगा दिया. बाद में सोनम की लाश एक पेड़ की डाल पर लटका दी.

परिवारवालों के अनुसार पेड़ के नीचे खून टपका हुआ था.

आरोप है कि सोनम के साथ दुराचार अथवा दुराचार के प्रयास के बाद उसकी ह्त्या कर इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की गई.

परिवार का कहना है पुलिस वालों ने उनका मुंह बंद करने के लिए पैसे देने का भी लालच दिया.

सोनम का पहला पोस्टमॉर्टम करने वालों डाक्टरों ने भी पुलिस की कहानी का समर्थन करते हुए संकेत दिया था कि सोनम की मौत का कारण लटकने से आत्मह्त्या है.

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Image caption इस मामले पर राजनीति भी तेज़ हुई और दिग्विजय सिंह ने यूपी में जंगल राज का आरोप लगाया है.

लेकिन मीडिया और विपक्ष के दबाव पर दोबारा पोस्टमॉर्टम हुआ जिसमे चोट और हत्यां की बात कही गई. पुलिस का कहना है कि किसी रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नही हुई.

हाईकोर्ट की फटकार

मामले की सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की गई है. याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माया सरकार को आड़े हाथो लिया. हाईकोर्ट ने अब तक जांच की प्रगति पर दो दिनों में रिपोर्ट मांगी है.

समझा जाता है कि हाईकोर्ट में याचिका के कारण ही माया सरकार ने लखीमपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डी के राय को निलंबित किया और सीबीआई जांच पर एतराज़ न होने की बात कही.

मायावती ने प्रेस को संबोधित करते हुए विपक्ष को नसीहत दी कि वो इस मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय असली दोषियों को पकड़वाने में मदद करें.

लेकिन उसके तुरंत बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज नही बल्कि जंगल राज है.

दिग्विजय सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मृत युवती मुस्लिम समुदाय से है.

दिग्विजय सिंह का कहना है कि राज्य पुलिस इस मामले में न्याय नही कर पाएगी इसलिए सीबीआई जांच जरूरी है.

समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी भी सीबीआई जांच पर बल दे रही हैं.

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