तेलंगाना पर विधायकों, सांसदों का इस्तीफ़ा

तेलंगाना के नेता इमेज कॉपीरइट Other

आंध्र प्रदेश राज्य एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर कांग्रेस के दस सांसदों और 42 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है जबकि तेलुगूदेसम के 36 विधायकों ने भी त्यागपत्र दे दिए हैं.

कांग्रेस के 42 विधायकों में 11 मंत्री भी हैं.

हैदराबाद में इन विधायकों ने विधानसभा में उप सभापति भट्टी विक्रमारका से भेंट कर अपने त्यागपत्र उन्हें सौंपे. इसी तरह विधानपरिषद में कांग्रेस के सात सदस्यों ने भी त्यागपत्र दे दिए हैं.

हैदराबाद में विधानसभा भवन के आसपास का इलाक़ा जय तेलंगाना के नारों से गूँज रहा है. लोग जुलूस निकाल रहे हैं और गाना-बजाना भी हो रहा है.

दिल्ली में तेलंगाना से कांग्रेस पार्टी के दस सांसदों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है. सांसदों का कहना है कि वो बस इतना चाहते हैं कि यूपीए सरकार ने जो बयान दिया था तेलंगाना के मुद्दे पर उस बयान को लागू करे. इन सांसदों का कहना है कि अगर सरकार इस बयान को लागू नहीं करेगी तो उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर ले.

इस बात पर लोगों का ध्यान है कि क्या केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी भी त्यागपत्र देंगे या नहीं. रविवार को तमाम तेलंगाना सांसदों ने उनसे भेंट कर ज़ोर दिया था की वे भी त्यागपत्र दे दें. एक सांसद के राजगोपाल रेड्डी ने कहा कि जयपाल रेड्डी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे भी त्यागपत्र दे देंगे. हालांकि अभी तक जयपाल रेड्डी के त्यागपत्र की बात सामने नहीं आई है.

मांग

इन सबकी मांग है कि केंद्र सरकार तुरंत तेलंगाना राज्य की स्थापना की घोषणा करे.

आंध्र प्रदेश में 294 सदस्यों वाले विधानसभा में तेलंगाना क्षेत्र से कांग्रेस के 50 और तेलुगूदेशम के 36 सदस्य हैं.

अब तक केवल उप मुख्यमंत्री दामोदर रजा नरसिम्हा और दो मंत्री दान नगेंदर और मुकेश गौड़, विधानसभा के उपाध्यक्ष भट्टी विक्रमारका और एक-दो विधायक ही त्यागपत्र न देने के मूड में हैं.

जबसे तेलंगाना के प्रतिनिधयों ने इस्तीफ़े की घोषणा की है, कांग्रेस आला कमान ने उन्हें समझाने-बुझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन इन प्रतिनिधयों ने किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है.

उनका कहना है कि वो त्यागपत्र देने के बाद ही आला कमान से बात करेंगे और उन्हें तेलंगाना राज्य की घोषणा से कम कोई चीज़ स्वीकार्य नहीं होगी.

स्वागत

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने त्यागपत्र के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जो लोग अब इस्तीफ़ा नहीं देंगे, उन्हें तेलंगाना की जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा और जो इस्तीफ़ा देंगे उनका पूरा सम्मान किया जाएगा.

इमेज कॉपीरइट Other
Image caption तेलंगाना के नेता इस्तीफ़ा देने पर अड़े हुए हैं

दूसरी और आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों से संबंध रखने वाले विधायक भी जवाबी क़दम उठाने पर विचार कर रहें हैं. उनमें से कुछ त्यागपत्र देने पर विचार कर रहे हैं, ताकि केंद्र को तेलंगाना राज्य के पक्ष में कोई फ़ैसला करने से रोका जाए.

इससे आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के संकट में पड़ जाने के आसार हैं और अभी से ऐसे संकेत मिलने लगे हैं की अगर हालात ज़्यादा ख़राब हुए, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है.

इन राजनीतिक घटनाओं के बाद तेलंगाना में तनाव बढ़ गया है. जिन मंत्रियों ने इस्तीफ़ा न देने का फ़ैसला किया है उनके घरों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

संवेदनशील इलाक़ों में केंद्रीय सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है.

संबंधित समाचार