कश्मीर:सेना की क्रिकेट कूटनीति

भारत प्रशासित कश्मीर(फ़ाईल फोटो)
Image caption सरकार की कोशिश है कि युवाओं के हाथों में पत्थर की जगह क्रिकेट की गेंद हो.

भारत प्रशासित कश्मीर मे लोगों की नाराज़गी को दूर करने के लिए सेना ने आईपीएल की तर्ज़ पर एक क्रिकेट लीग का आयोजन किया है, जिसे कश्मीर क्रिकेट लीग का नाम दिया गया है.

भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले साल विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान सरकारी कार्रवाईयों में सौ से ज़्यादा नौजवानों की मौत से नौजवानों में जो भारत विरोधी भावना पैदा हुई है उसे समाप्त करने के लिए भारतीय सेना ने बडे़ पैमाने पर क्रिकेट मुक़ाबलों का आयोजन किया है.

सोमवार को श्रीनगर में स्थित सेना की 15वीं कोर, जिसे सेना अब चिनार कोर कहती है, के प्रमुख जनरल सैयद अता हसनैन ने घाटी में कश्मीर प्रीमियर लीग या केपीएल के पहले मुक़ाबले का उदघाटन किया.

इसे कश्मीर के लिए बेहतरीन क्षण क़रार देते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीरी युवाओं के मनोरंजन के लिए सेना हमेशा प्रयासरत रहेगी.

उदघाटन समारोह में मुख्यमंत्री उमर अबदुल्लाह भी मौजूद थे.

ग़ौरतलब है कि पिछले साल लगभग पांच महीने तक चले ज़बर्दस्त सरकार विरोधी आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने सख्त कार्रवाई की थी.

सेना ने इस साल मई महीने में ही इंडियन प्रीमियर लीग की तर्ज़ पर कश्मीर प्रीमियर लीग का आयोजन किया था.

मई और जून में घाटी भर से 193 वें टीमों ने विभिन्न मुक़ाबलों में हिस्सा लिया जिनमें से 14 बेहतरीन टीमों का चयन किया गया.

ये 14 टीमें श्रीनगर, बडगाम, अनंतनाग, बारामुल्ला, कुपवारा, कुलगाम, शोपियान, गंदरबल और पुलवामा ज़िले से चुनी गई हैं.

पहला मुक़ाबला 'बडगाम बादशाज़' और 'श्रीनगर शेरदिल' टीमों के बीच हुआ.

इस टुर्नामेंट की विजेता टीम को चिनार कप के अलावा पांच लाख रुपए का नक़द इनाम भी दिया जाएगा, जबकि फ़ाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम को तीन लाख रूपए का इनाम दिया जाएगा.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पिछले साल भारतीय कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फ़ायरिंग में एक सौ से भी ज़्यादा नौजवान मारे गए थे.

पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले तीन खिलाड़ियों को भारत की तीन बेहतरीन क्रिकेट अकाडमियों में मुफ़्त दाख़िला दिया जाएगा.

इस साल अलगाववादियों पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है और बड़े पैमाने पर नौजवानों को गिरफ़्तार किया है जिसके कारण विरोध प्रदर्शनों के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है.

इस सिलसिले में विपक्षी पार्टी के नेता मुफ़्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि सरकार ने पुलिस राज की बदौलत तत्कालिक शांति क़ायम कर रखी है, लेकिन दूसरी तरफ़ घाटी में भारी संख्याम में अमरनाथ यात्री और पर्यटक आ रहें हैं और सरकार के अलावा सेना और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां खेलों, मेलों और दूसरे तरह के मनोरंजक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है.

एक विधायक इंजीनियर अब्दुर रशीद कहते हैं, ''कश्मीर की जो स्थिति है उस परिपेक्ष्य में वहां नौजवानों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत सुरक्षा की है. नौजवान ज़िंदा रहना चाहते हैं. वो नही चाहता कि पुलिस उसका पीछा करती रहे या उसे गिरफ़्तार करे. आप इसका इंतज़ाम कर दीजिए, वह ख़ुद खेलकूद भी कर लेंगे.''

विश्लेषकों का कहना है कि सेना और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद जन संपर्क अभियान में तेज़ी के साथ सरगर्म हो गई हैं.

राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर मुबारक कहते हैं, ''नौजवानों का दिल जीतने के लिए सरकार ने दर्जनों नेता को क़ैद कर लिया है और करोड़ों रुपए की लागत से ये आयोजन किए जाते हैं. मुझे लगता है कि नई दिल्ली हमेशा की तरह तत्कालिक कार्रवाई में विश्वास रखती है, लेकिन इसके परिणाम अच्छे नहीं होगें.''

संबंधित समाचार