'आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन नहीं'

Image caption बंद की वजह से सुनसान पड़ी सड़कें

पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश में उठे राजनीतिक संकट के बावजूद केंद्र सरकार फ़िलहाल वहां राष्ट्रपति शासन के बारे में विचार नहीं कर रही है.

बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की कोई संभावना नहीं है.

चिदंबरम ने कहा कि इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए इस्तीफ़ा देने वाले सांसदों और विधायकों से बातचीत जारी है.

विश्लेषकों का मानना है कि अगर राज्य में राजनीतिक गतिरोध इसी तरह चलता रहा तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

इस्तीफ़ा

पृथक तेलंगाना राज्य के समर्थन में अभी तक राज्य के 294 में से 99 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इनमें से 45 कांग्रेस, 37 तेलुगु देसम पार्टी, 11 तेलंगाना राष्ट्र समिति, चार सीपीआई और दो बीजेपी के विधायक है. एक टीडीपी विधायक ने दो हफ़्ते पहले ही अपना इस्तीफ़ा दे दिया था.

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Image caption तेलंगाना बंद से जनजीवन प्रभावित

इस तरह तेलंगाना क्षेत्र के 119 में से अब तक 100 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

बाक़ी बचे 19 में से सात विधायकों वाली मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमिन ने विधायकों के इस्तीफ़े से इनकार कर दिया है.

पुराने हैदराबाद के इलाक़ों में मज़बूत मानी जानेवाली मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमिन राज्य को दो भागों में बांटे जाने के ख़िलाफ़ है.

राजनीतिक समीकरण

294 सदस्यीय विधानसभा में 100 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद विधानसभा में 194 सदस्य रह गए हैं.

इस विधानसभा में कांग्रेस को अभी भी बहुमत हासिल है और सरकार को तकनीकी रूप से कोई ख़तरा नहीं है.

आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एन मनोहर विदेश दौरे पर अमरीका में हैं और वो 12 जुलाई के बाद ही स्वदेश लौटेंगे. उनके वापस आने तक फ़िलहाल यथास्थिति बनी रहने की संभावना है.

पृथक तेलंगाना के मसले पर तेलंगाना क्षेत्र के 17 में से 13 सांसदों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इनमें से नौ कांग्रेस, दो टीआरएस और दो टीडीपी के सांसद हैं. इनके इस्तीफ़े को लेकर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया है.

आंध्र प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद, लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल इस्तीफ़ा देनेवाले सांसदों को मनाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. लेकिन गतिरोध बरकरार है.

तेलंगाना क्षेत्र के सांसद और विधायक आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. ऐसे में इस गतिरोध के जल्दी ख़त्म होने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है.

बंद

इस बीच तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के 48 घंटे के बंद के आह्वान की वजह से तेलंगाना क्षेत्र में जनजीवन ठप पड़ गया है.

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद और तेलंगाना क्षेत्र के नौ ज़िलों में परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है.आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन निगम की 10 हज़ार से ज़्यादा बसें नहीं चल रही हैं. लोग यहां वहां फंसे हुए हैं.

बंद की वजह से दुकानें, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, होटल, पेट्रोल पंप और शैक्षणिक संस्थान दूसरे दिन भी बंद हैं.

उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में मंगलवार को हुई हिंसा के बाद तनाव बना हुआ है.

तेलंगाना समर्थक छात्रों की बुधवार को जुलूस निकालने की योजना है जबकि पुलिस इसे रोकने की तैयारी में लगी है. लेकिन अभी तक कहीं से हिंसा की कोई ख़बर नहीं है.

हालांकि हैदराबाद के व्यस्त चौराहे पर धरने पर बैठे तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोडंडाराम को ग़िरफ़्तार कर लिया गया है.

इस बीच तेलंगाना के सरकारी कर्मचारी और उनकी संघर्ष समिति ने कहा है कि वे जल्दी ही सरकार के असहयोग का अभियान शुरू करेंगे.

तेलंगाना विरोध

Image caption टीआरएस सांसद चंद्रशेखर राव समेत 13 तेलंगाना सांसदों ने दिया इस्तीफ़ा

तेलंगाना की चार-पांच दिन की घटनाओं का असर राज्य की रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश में भी देखा जा सकता है जहां लोगों की बेचैनी बढ़ गई है.

छात्रों ने तेलंगाना के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं.

इन क्षेत्रों के राजनेताओं पर भी तेलंगाना के विरोध में तेलंगाना क्षेत्र के राजनेताओं की तर्ज़ पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ रहा है. अगर ऐसा होता है तो राज्य के हालात और बिगड़ सकते हैं.

ऐसे में अब सारा ध्यान दिल्ली पर केंद्रीत है जहां समस्या के हल के लिए मुलाक़ातों का सिलसिला जारी है.

मंगलवार को तेलंगाना के सांसदों और विधायकों ने ग़ुलामनबी आज़ाद और प्रणब मुखर्जी से मुलाक़ात की थी. प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि वो जल्द से जल्द पृथक तेलंगाना राज्य का निर्माण चाहते हैं, इसके लिए केंद्र सरकार को तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए.

प्रतिनिधिमंडल का ये भी कहना था कि तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के लिए केंद्र सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाती है या कोई और तरीक़ा अपनाती है ये पूरी तरह सरकार पर निर्भर है.

गुलाम नबी आज़ाद ने सांसदों और विधायकों की मांगों को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की थी.

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