'डेनमार्क की अदालत का फ़ैसला निराशाजनक'

पीटर ब्लीच(फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption भारत के राष्ट्रपति ने 2004 में एक और अभियुक्त पीटर ब्लीच को रिहा कर दिया था.

भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि किम डेवी के प्रत्यर्पण मामले में डेनमार्क की अदालत का फ़ैसला निराशाजनक है.

बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं.

किम डेवी 1995 में हुए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया हथियार कांड के मुख्य अभियुक्त हैं और इस समय डेनमार्क में हैं.

डेनमार्क की एक अदालत ने इसी साल 30 जून को दिए गए अपने एक फ़ैसले में उन्हें भारत प्रत्यर्पित किए जाने की याचिका नामंज़ूर कर दी थी.

डेनमार्क अदालत के उसी फ़ैसले पर बयान देते हुए चिदंबरम ने कहा, ''हम (भारत में) कैदियों को प्रताड़ित किए जाने और अभियुक्तों के मानवाधिकार के हनन की दलीलों को ख़ारिज करते हैं. मैने विदेश मंत्री को एक ख़त लिखकर इन सब बातों का ज़िक्र किया है और उनसे अनुरोध किया है कि वो डेनमार्क सरकार को इस बात के लिए ज़ोर दें कि वह अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ वहां की सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करें.''

चिदंबरम ने कहा कि डेनमार्क की सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए एक निश्चित समय सीमा है लेकिन अभी उसमें समय है.

चिदंबरम ने विश्वास जताया कि भारत का विदेश मंत्रालय इस बात को डेनमार्क सरकार के सामने ज़रूर उठाएगा.

'आरोप बेबुनियाद'

चिदंबरम ने कहा कि अगर किम डेवी को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उनका मुक़दमा खुली अदालत में चलेगा. उन्हें रोज़ाना अदालत में जज के सामने पेश किया जाएगा. अगर उन्हें लगता है कि उनके साथ प्रताड़ना की गई है तो वो अगली सुबह अदालत को ये बता सकते हैं.

चिदंबरम ने ये भी कहा कि किम डेवी को अपने दूतावास के अधिकारियों से संपर्क करने की पूरी आज़ादी होगी.

गृहमंत्री ने कहा कि डेनमार्क अदालत ने जिन दलीलों के आधार पर किम डेवी के प्रत्यर्पण याचिका को ख़ारिज किया है उसका कोई आधार नहीं है.

इससे पहले डेनमार्क सरकार ने दो शर्तों के आधार पर किम डेवी भारत को प्रत्यर्पित करने की मंज़ूरी दी थी. एक तो ये कि किम डेवी को फाँसी नहीं दी जाएगी और दूसरे अगर उन्हें सज़ा दी जाती है तो वे ये सज़ा डेनमार्क में काटेंगे.

भारत ने ये दोनों बातें मान ली थी लेकिन बावजूद इसके किम डेवी ने डेनमार्क सरकार के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दे दी थी.

अदालत ने अपने फ़ैसले में उन्हें भारत प्रत्यर्पित किय जाने की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.

इसे सीबीआई के लिए धक्का माना जा रहा है. हालांकि किम डेवी के प्रत्यार्पण के मामले में सीबीआई की कोई भूमिका नहीं है.

ये मामला किम डेवी और डेनमार्क की सरकार के बीच है. सीबीआई ने इस मामले में सहयोग के लिए एक टीम भी भेजी थी

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