तेलंगाना बंद के दौरान छात्र-पुलिस टकराव

Image caption ओस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने पथराव किया, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी

पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर जारी दो दिन के बंद के बीच उस्मानिया विश्वविद्यालय कैंपस में ताज़ा हिंसा भड़क उठी है. छात्रों ने तेलंगाना की मांग को लेकर जुलूस निकलने की कोशिश की जिसे पुलिस और अर्ध सैनिक बलों ने रोक दिया.

इसपर गुस्साए छात्रों ने पथराव किया जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

इस हिंसा में दो पत्रकार ज़ख़्मी हो गए हैं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है.

उधर, वारंगल ज़िले में श्रीकांत नाम के युवक ने केंद्र सरकार के रवैये से नाराज़गी जताते हुए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है.

आंध्र प्रदेश के नलगोंडा ज़िले में तेलंगाना समर्थकों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालय में आग लगा दी क्योंकि ये दल अलग तेलंगाना राज्य की मांग का समर्थन नहीं करता.

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस दल का एकमात्र विधायक भी दूसरे दलों के विधायकों की तरह त्यागपत्र दे दे.

इस बीच, पुलिस ने कुछ विधायकों और एक सांसद समेत 50 नेताओं को बुधवार को उस वक़्त गिरफ्तार कर लिया जब उन्होंने राजभवन के सामने धरना देने की कोशिश की. ये लोग तेलंगाना से अर्धसैनिक बलों को हटाने की मांग कर रहे थे.

इस बीच तेलंगाना के सरकारी कर्मचारी और उनकी संघर्ष समिति ने कहा है कि वे जल्दी ही सरकार के असहयोग का अभियान शुरू करेंगे.

राष्ट्रपति शासन नहीं

Image caption बंद की वजह से सुनसान पड़ी सड़कें

पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश में उठे राजनीतिक संकट के बावजूद केंद्र सरकार फ़िलहाल वहां राष्ट्रपति शासन के बारे में विचार नहीं कर रही है.

बुधवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की कोई संभावना नहीं है.

चिदंबरम ने कहा कि इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए इस्तीफ़ा देने वाले सांसदों और विधायकों से बातचीत जारी है.

विश्लेषकों का मानना है कि अगर राज्य में राजनीतिक गतिरोध इसी तरह चलता रहा तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

इस्तीफ़ा

पृथक तेलंगाना राज्य के समर्थन में अभी तक राज्य के 294 में से 99 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इनमें से 45 कांग्रेस, 37 तेलुगु देसम पार्टी, 11 तेलंगाना राष्ट्र समिति, चार सीपीआई और दो बीजेपी के विधायक है. एक टीडीपी विधायक ने दो हफ़्ते पहले ही अपना इस्तीफ़ा दे दिया था.

इस तरह तेलंगाना क्षेत्र के 119 में से अब तक 100 विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

बाक़ी बचे 19 में से सात विधायकों वाली मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमिन ने विधायकों के इस्तीफ़े से इनकार कर दिया है.

पुराने हैदराबाद के इलाक़ों में मज़बूत मानी जानेवाली मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमिन राज्य को दो भागों में बांटे जाने के ख़िलाफ़ है.

राजनीतिक समीकरण

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Image caption तेलंगाना बंद से जनजीवन प्रभावित

294 सदस्यीय विधानसभा में 100 विधायकों के इस्तीफ़े के बाद विधानसभा में 194 सदस्य रह गए हैं.

इस विधानसभा में कांग्रेस को अभी भी बहुमत हासिल है और सरकार को तकनीकी रूप से कोई ख़तरा नहीं है.

आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एन मनोहर विदेश दौरे पर अमरीका में हैं और वो 12 जुलाई के बाद ही स्वदेश लौटेंगे. उनके वापस आने तक फ़िलहाल यथास्थिति बनी रहने की संभावना है.

पृथक तेलंगाना के मसले पर तेलंगाना क्षेत्र के 17 में से 13 सांसदों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इनमें से नौ कांग्रेस, दो टीआरएस और दो टीडीपी के सांसद हैं. इनके इस्तीफ़े को लेकर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया है.

आंध्र प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद, लोकसभा में कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल इस्तीफ़ा देनेवाले सांसदों को मनाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. लेकिन गतिरोध बरकरार है.

त्यागपत्र देने वाले एक वरिष्ठ मंत्री जाना रेड्डी ने दिल्ली में कांग्रेस के केन्द्रीय नेताओं ग़ुलाम नबी आज़ाद, प्रणब मुखर्जी और अहमद पटेल से मुलाक़ात के बाद ये साफ़ कर दिया है कि किसी विधायक के इस्तीफ़ा वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि असल मुद्दा तेलंगाना राज्य की स्थापना का है और केंद्र को इसे पूरा करना ही पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग ये अफ़वाहें फैला रहे हैं कि विधायक और सांसद इस्तीफा वापस ले सकते हैं. इसका उद्देश्य तेलंगाना समर्थकों के बीच फूट डालना है.

तेलंगाना क्षेत्र के सांसद और विधायक आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. ऐसे में इस गतिरोध के जल्दी ख़त्म होने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है.

बंद

इस बीच तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के 48 घंटे के बंद के आह्वान की वजह से तेलंगाना क्षेत्र में जनजीवन ठप पड़ गया है.

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद और तेलंगाना क्षेत्र के नौ ज़िलों में परिवहन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है.आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन निगम की 10 हज़ार से ज़्यादा बसें नहीं चल रही हैं. लोग यहां वहां फंसे हुए हैं.

बंद की वजह से दुकानें, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, होटल, पेट्रोल पंप और शैक्षणिक संस्थान दूसरे दिन भी बंद हैं.

तेलंगाना विरोध

Image caption टीआरएस सांसद चंद्रशेखर राव समेत 13 तेलंगाना सांसदों ने दिया इस्तीफ़ा

तेलंगाना की चार-पांच दिन की घटनाओं का असर राज्य की रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश में भी देखा जा सकता है जहां लोगों की बेचैनी बढ़ गई है.

छात्रों ने तेलंगाना के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं.

इन क्षेत्रों के राजनेताओं पर भी तेलंगाना के विरोध में तेलंगाना क्षेत्र के राजनेताओं की तर्ज़ पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ रहा है. अगर ऐसा होता है तो राज्य के हालात और बिगड़ सकते हैं.

ऐसे में अब सारा ध्यान दिल्ली पर केंद्रीत है जहां समस्या के हल के लिए मुलाक़ातों का सिलसिला जारी है.

कांग्रेस के आंध्र प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बुधवार को भी तेलंगाना के विधायकों और सांसदों से मुलाक़ात की.

इस मुलाक़ात के बाद बीबीसी से बातचीत में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के केशव राव ने कहा कि हमने चुनाव घोषणापत्र में तेलंगाना राज्य के गठन का वादा किया था.

केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में कहा था कि तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और हम चाहते हैं कि उसे पूरा किया जाए.

केशव राव ने कहा कि केंद्र के साथ बातचीत तो आठ साल हो रही है. अब तेलंगाना के लोग समाधान चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि राज्य के गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जानी चाहिए.

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