तेलंगाना में प्रदर्शनों का नया दौर

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अलग तेलंगाना राज्य के लिए दो दिन के बंद की सफलता के बाद तेलंगाना का समर्थन कर रहे संगठनों ने नए प्रदर्शनों की घोषणा की है.

इसके अंतर्गत गुरुवार को पूरे तेलंगाना के हर शहर, कस्बे और गाँव में कॉलेजों और स्कूलों के छात्र जुलूस निकालेंगे और उन विधायकों और सांसदों का समर्थन करेंगे जिन्होंने अलग राज्य के लिए त्यागपत्र दिए हैं. छात्रों के जुलूसों के कार्यक्रम के मद्देनज़र हैदराबाद सहित हर जगह सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की 73 कंनियाँ तैनात की गई हैं.

एक बार फिर ओस्मानिया विश्व विद्यालय पर लोगों की नज़रें टिकी हुई हैं, जहाँ गत दो दिनों से छात्रों और पुलिस के बीच झड़पों में 10 से ज़्यादा लोग घायल हो चुके हैं.

एक और इस्तीफ़ा

इस बीच तेलंगाना राज्य के लिए त्यागपत्र देने का सिलसिला जारी है. तेलंगाना से तेलुगूदेसम की एक राज्यसभा सदस्य गुंडू सुधा रानी ने अपने त्यागपत्र की घोषणा कर दी है.

उन्होंने वारंगल में कहा कि उन्होंने तेलंगाना के पक्ष में अपना पद छोड़ दिया है और अपना त्यागपत्र राज्यसभा के सभापति को भिजवा दिया है.

इस तरह अब तक त्यागपत्र देने वाले सांसदों की संख्या 15 तक पहुँच गई है. इनमें 13 लोकसभा के और दो राज्यसभा के सदस्य हैं.

इससे पहले कांग्रेस के एक राज्यसभा सदस्य केशव राव ने भी त्यागपत्र दिया था. अब तेलंगाना से कांग्रेस के तीन शेष राज्यसभा सदस्यों और तीन लोकसभा सदस्यों पर इस बात के लिए दबाव बढ़ रहा है कि वो भी त्यागपत्र दे दें.

आंदोलन

इस बीच तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने बंद को सफल बनाने पर लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब यह आंदोलन उसी समय थमेगा जब केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की घोषणा करेगी.

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Image caption तेलंगाना में दो दिनों का बंद सफल रहा था

समिति ने शुक्रवार और शनिवार को रेल रोको कार्यक्रम की घोषणा की है. संयुक्त समिति, तेलंगाना राष्ट्र समिति और दूसरे कई संगठनों ने पूरे तेलंगाना में रेल पटरियों के आसपास के गाँव के लोगों से कहा है की वो लाखों की संख्या में पटरियों पर बैठ जाएँ, ताकि कोई ट्रेन न चल सके.

टीआरएस के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने कहा, "यह रेल रोको कार्यक्रम उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल संपर्क को काट देगा."

आंदोलन को और भी तीव्र करने के लिए अब सरकारी कर्मचारी भी इसमें शामिल होने वाले हैं. सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों, शिक्षकों और कामगारों की 78 संगठनों पर आधारित संयुक्त संघर्ष समिति की एक बैठक हैदराबाद में होने वाली है.

इस बैठक में यह फ़ैसला किया जायेगा कि उन्हें अनिश्चतकाल की हड़ताल करना चाहिए या फिर असहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए.

अगर ऐसा होता है तो फिर सरकारी कामकाज बिल्कुल ठप होकर रह जाएगा. दो दिनों की हड़ताल के कारण पहले ही सरकारी कार्यालयों में कोई काम नहीं हो सका है.

स्वयं मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी के कार्यालय में कोई 1200 फ़ाइलों का ढेर लगा है.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि अगर इन सबके बावजूद केंद्र सरकार अपनी जगह से नहीं हिलती है, तो फिर आगे बहुत कुछ हो सकता है.

भविष्य की कार्ययोजना में अनिश्चितकाल की आम हड़ताल और अनिश्चित काल के लिए हैदराबाद का घेराव करना भी शामिल है.

आंध्र में प्रतिक्रया

इधर तेलंगाना में होने वाली इन घटनाओं के बाद अब राज्य के दूसरे दो क्षेत्रों आंध्र और रायलसीमा में भी लोगों में बेचैनी बढ़ रही है.

वहाँ के छात्रों की संयुक्त आंध्र प्रदेश संघर्ष समिति ने भी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है. इनमें जुलूस निकलना और धरना देना शामिल है.

अगले कुछ दिनों में ये लोग विधायकों और सांसदों के घरों का घेराव करेंगे ताकि उनके त्यागपत्र की मांग की जाए.

पहले ही से इन दो क्षेत्रों में कई स्थानों पर प्रदर्शनों, धरनों और पुतले जलाने का सिलसिला शुरू हो गया है और तनाव बढ़ता जा रहा है. यह लोग राज्य के बँटवारे का विरोध कर रहे हैं.

वहाँ के एक वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री जेसी दिवाकर रेड्डी ने कहा कि ज़रुरत पड़ने पर इन दोनों क्षेत्रों के विधायक और सांसद भी त्यागपत्र दे सकते हैं.

आंध्र के कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने बुधवार को दिल्ली में प्रणब मुखर्जी से बात की और उनसे एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने का समय मांगा है.

अनुमान है कि इन दोनों क्षेत्रों के नेता 12 जुलाई को प्रणब मुखर्जी से मिलेंगे और उन पर तेलंगाना न बनाने के लिए दबाव डालेंगे.

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