इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएगें कि 10 जुलाई के रोज़ जर्मन वायुसेना ने इंग्लैंड के ऊपर चढ़ाई कर दी थी. साल 1985 में फ्रांसीसी ख़ुफ़िया एजेंटों ने ग्रीनपीस का जहाज़ डुबोया था.

1940 : जर्मन वायुसेना ने ब्रिटेन पर हमला किया

Image caption हिटलर का मानना था कि ब्रितानी नौसेना को कमज़ोर करना है तो उसे उसके आसमान में हराना होगा

इसी दिन साल 1940 में जर्मन वायुसेना लुफ्त्वाफ़ ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इंग्लैंड के ऊपर चढ़ाई कर दी थी. ब्रितानी प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने तीन हफ़्ते पहले इस युद्ध को 'ब्रिटेन की लड़ाई' का नाम दिया था.

इस युद्ध में ब्रितानी वायुसेना जर्मन वायुसेना के मुकाबले काफ़ी ज़्यादा कमज़ोर थी. ब्रितानी वायु मंत्रालय ने पहले हमले के बाद दावा किया कि जवाबी हमले में ब्रितानी वायु सेना ने 14 जर्मन जहाज़ों को मार गिराया और 23 को क्षति पहुंचाई. सरकार के अनुसार इस हमले में दो ब्रितानी जहाज़ भी खेत रहे.

हिटलर को अंदाज़ था की ब्रितानी नौसेना जर्मन नौसेना से मज़बूत है और उसे हराना मुश्किल है इसलिए उसकी योजना थी की ब्रिटेन को उसकी नौ सेना के इस्तेमाल के पहले इतना कमज़ोर कर दो कि उसकी सीमाओं में समुद्र के रास्ते घुसते समय प्रतिरोध अधिक ना हो.

ब्रिटेन ने इस युद्ध में दुनिया में पहली बार रडार का इस्तेमाल किया जिसकी वजह से जर्मन वायुसेना की ताकत सीमित हो गई. आनेवाले दिनों में लडा़ई बढ़ते बढ़ते दोनों देशों की राजधानियों तक जा पहुंची. ब्रिटेन और जर्मनी दोनों ने लंदन और बर्लिन के ऊपर बम गिराए. आखिरक़ार ब्रिटेन ने इस युद्ध में जीत हासिल की.

1985 : ग्रीनपीस का जहाज़ रेनबो वॉरीअर धमाके के साथ डूबा

Image caption ग्रीनपीस ने दूसरा 1989 में रेनबो वॉरियर ही के नाम से एक और जहाज़ लॉन्च किया

पर्यावरण के लिए काम करने वाले वैश्विक स्वयंसेवी संगठन ग्रीनपीस का एक जहाज़ न्यूजीलैंड के ऑकलैंड बंदरगाह पर धमाके के साथ डूब गया. इस धमाके में जहाज़ के चालक दल का एक सदस्य भी मारा गया.

ये जहाज़ ऑकलैंड से जहाज़ों का एक काफ़िला ले कर प्रशांत क्षेत्र के मुरुरोआ एटोल जा रहा था जहाँ फ़्रांस परमाणु परिक्षण करने वाला था. जांच के बाद आखि़रकार ये पता लगा की इस कार्रवाई को फ़्रांस के ख़ुफ़िया एजेंटो ने अंजाम दिया था. तमाम हीले हवाले के बाद फ़्रांस ने घटना के ज़िम्मेदारी स्वीकार की और न्यूज़ीलैंड को 70 लाख डॉलर का हर्जाना दिया.

पांच साल बाद संयुक्त राष्ट्र ने फ़्रांस की इस घटना को अंजाम देने वाले अपने एजेंटों को सज़ा ना देने के लिए निंदा की.

फ़्रांस ने 1998 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण संधि पर हस्ताक्षर किए लेकिन उसके पहले उसने 193 परमाणु परीक्षण कर लिए थे.

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