'हक़ मांगने पर गोली मारी जाती है'

किसान महापंचायत
Image caption किसान महापंचायत के ज़रिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी खोई राजनीतिक ज़मीन तलाश करने की कोशिश कर रही है.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में अपना हक़ मांगने पर किसानों को गोली मारी जाती है.

शानिवार को अलीगढ़ के नुमाइश मैदान में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि किसान सिर्फ़ अपना हक़ मांग रहें हैं लेकिन उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार उन पर गोलियां चलाती हैं.

पिछले साल अलीगढ़ के क़रीब टप्पल में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों और इस साल कुछ दिन पहले ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल में किसानों पर पुलिस के ज़रिए गोली चलाने का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन दोनों जगहों पर किसान केवल अपना हक़ मांग रहे थे.

राहुल गांधी ने सिर्फ़ 15 मिनट तक किसानों को संबोधित किया.

अपने छोटे से भाषण में उन्होंने राज्य की मायावती सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकार ग़रीब किसानों से उनकी ज़मीन छीन रही है.

राहुल ने पिछले चार दिनों से यूपी के अलग-अलग गावों के अपने दौरे का अनुभव बयान करते हुए कहा कि किसान विकास के ख़िलाफ़ नहीं है.

'जनता से बातचीत'

राहुल के अनुसार किसान सड़क और विकास के ख़िलाफ़ नहीं है,वो सिर्फ़ ये कहते हैं कि अगर सरकार हमारी ज़मीन लेती है तो हमें सही मुआवज़ा दे.

मायावती सरकार के ज़रिए उनकी पदयात्रा को नौटंकी क़रार दिए जाने का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनकी सोच के अनुसार राजनेता को जनता के बीच जाने की ज़रूरत है.

राहुल गांधी ने कहा कि बहुत सारे किसानों ने उनसे कहा कि भूमि- अधिग्रहण का़नून बहुत पुराना हो चुका है, उसमें बदलाव की ज़रूरत है.

इसके जवाब में राहुल ने कहा कि उनका भी ये मानना है कि क़ानून में कुछ सुधार की ज़रूरत है.

लेकिन राहुल ने कहा कि सिर्फ़ क़ानून बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा.

उन्होंने हरियाणा की कांग्रेस सरकार की तारीफ़ करते हुए कहा कि वहां भी वही क़ानून लागू है लेकिन हरियाणा में सरकार किसानों से बातचीत करती है तब कोई फ़ैसला करती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में सरकार किसानों से बात नहीं करती है.

राहुल के अनुसार उत्तर प्रदेश में किसानों को उस वक्त ज़मीन अधिग्रहण की ख़बर मिलती है जब बिल्डर आकर ज़मीन क़ब्ज़ा कर लेते हैं.

मायावती सरकार के ज़रिए हाल ही में लागू नई भूमि-अधिग्रहण नीति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नई नीति में हाल ही में अधिग्रहित ज़मीन के किसानों को कोई राहत नहीं दी गई है.

उन्होने पूछा कि क्या टप्पल और भट्टा-परसौल के किसानों को नई नीति का लाभ नहीं मिलना चाहिए.

राहुल गांधी ने कहा कि किसानों की सोच बड़े-बड़े अधिकारियों से बेहतर है. उन्होंने कहा कि किसानों से संबधित किसी भी का़नून में किसानों की सोच शामिल होनी चाहिए.

मायावती सरकार पर आक्रमण करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार के फ़ैसले में नियत सबसे ज़रूरी है. उनके अनुसार मायावती सरकार की नीयत साफ़ नही है.

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Image caption राहुल गांधी ने पदयात्रा के दौरान लगभग 70 किलोमीटर का सफ़र तय किया.

इससे पहले किसानों ने राहुल गांधी के सामने अपनी समस्या रखी. लेकिन उसमें किसानों की समस्या कम और राजनीतिक बयानबाज़ी ज़्यादा हो रही थी.

एक किसान ने कहा कि वर्षों पहले एक छोटा सा किसान महात्मा गांधी को चंपारण ले गया था और उसके बाद महात्मा गांधी ने देश भर में किसानों के लिए लड़ाई लड़ी, ठीक उसी तरह आज राहुल गांधी हमारे बीच हैं और हमारी समस्याओं को सुन रहें हैं.

इससे पहले बारिश के कारण लगभग तीन घंटे देरी से महापपंचायत शुरू हुई.

पहले ये महापंचायत शनिवार की सुबह साढ़े ग्यारह बजे शुरू होनी थी लेकिन बारिश की वजह से देरी हुई.

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी भी देर से वहां पहुंच सके. उन्हें वहां ग्यारह बजे के आस पास पहुंचना था लेकिन वो वहां दोपहर में लगभग दो बजे पहुंचे.

राहुल गांधी के पहुंचने के बाद विधिवत रूप से महापंचायत की शुरूआत हुई.

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह, राजबब्बर, प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और प्रमोद तिवारी आदि नेताओं ने धनीपुर हवाई पट्टी पर राहुल गांधी का स्वागत किया.

अलीगढ़ शहर के नुमाइश मैदान में होने वाले इस महापंचायत में शामिल होने के लिए सुबह से ही उत्तर प्रदेश के अलग−अलग इलाक़ों से किसान वहां पहुंचने लगे.

एक अनुमान के अनुसार लगभग तीस हज़ार किसान इस महापंचायत में शामिल थे.

मैदान में मुख्य मंच के साथ साथ दो और मंच बनाये गए थे, जिनमें से एक मंच पर कांग्रेस के बड़े मंत्री और नेता बैठें थे और दूसरे मंच पर किसान प्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी. जबकि मुख्य मंच पर राहुल गांधी के साथ रीता बहुगुणा, दिग्विजय सिंह, सलमान ख़ुर्शीद और प्रमोद तिवारी जैसे नेता मौजूद थे.

'राजनीति'

इस महापंचायत को लेकर प्रदेश भर के कांग्रेसि काफ़ी जोश में दिख रहें थे.

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि किसान महापंचायत कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम नहीं हैं बल्कि किसानों की समस्याओं को बांटने, समझने और उसका निपटारा तलाश करने के लिए आयोजित एक बैठक है.

कांग्रेस नेताओं का दावा चाहे जो हो लेकिन ये किसान महापंचायत कुल मिलाकर कांग्रेस की एक राजनीतिक रैली ही बन गई थी.

शनिवार सुबह से ही कांग्रेसी नेता राजनीतिक भाषण दे रहे थे.

सुबह भाषण देने वालों में केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट, सलमान ख़ुर्शीद, मुरादाबाद से पार्टी के सांसद अज़हरुद्दीन, राज्य सभा सांसद परवेज़ हाशमी, लोक सभा सांसद जगदम्बिका पाल शामिल थे.

बरेली से आए एक किसान हरिलाल ने कहा कि उनका 15 बिघा खेत सरकार ने ले लिया है और उन्हें सिर्फ़ 10 हज़ार रुपए प्रति बिघा के हिसाब से मुआवज़ा मिला है.

हरिलाल ने कहा कि वो तो अपनी समस्या के बारे में बातचीत करने आए थे लेकिन यहां तो राजनीति हो रही है.

उसी तरह सहारनपूर से आए अमित राणा ने भी कहा कि वो किसानो की समस्या के बारे में कुछ सुझाव देने आए थे लेकिन यहां तो केवल राजनीति हो रही है.

इससे पहले इस किसान महापंचायत को कामयाब बनाने के लिए राहुल गांधी ने मंगलवार से ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल से अपनी पदयात्रा की शुरूआत की थी.

शुक्रवार देर रात मथुरा के बाजना गांव में राहुल गांधी ने अपनी पदयात्रा समाप्त की थी और दिल्ली लौट आए थे.

चार दिन तक चले इस पदयात्रा के दौरान राहुल गांधी ने लगभग 70 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र तय किया था.

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