मंत्रिमंडल पर मनमोहन-सोनिया मंत्रणा

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Image caption मंत्रिमंडल फेरबदल पर मननोहन और सोनिया में चर्चा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल फेर बदल को एक बार फिर स्थगित कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार ऐसा रेल दुर्घटनाओं और सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम के इस्तीफ़े की वजह से हुआ है लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रधानमंत्री इस सिलसिले में और विचार-विमर्श करना चाहते हैं.

इसी सिलसिले में वह सोमवार को एक बार फिर सोनिया गाँधी से मिले. यह उनकी हाल के दिनों में चौथी मुलाक़ात थी.

संकेत मिल रहे हैं कि इस बार के फेरबदल में कम से कम 12 मंत्री शामिल रहेंगे. सूत्र कह रहे हैं कि इस बार के फेरबदल में तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंधोपाध्याय को जगह मिल सकती है. वैसे ममता बनर्जी की पूरी कोशिश होगी कि रेल मंत्रालय उनके क़रीबी दिनेश त्रिवेदी को दिया जाए.

प्रधानमंत्री ने द्रमुक की राय जानने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को करुणानिधि से मिलने के लिए चेन्नई भेजा था लेकिन समझा जाता है कि वर्तमान परिस्थतियो में डीएमके नए लोगों को नामांकित न कर मंत्रिमंडल में पहले से मौजूद जूनियर मंत्रियों को तरक्की दिलवाना चाहेगी.

ख़ासकर उस समय जब उसके दो मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफ़ा दे चुके हैं और पार्टी प्रमुख की पुत्री कनिमोड़ी जेल में बंद हैं.

करुणानिधि ने प्रणव मुखर्जी को यह स्पष्ट भी कर दिया था कि उनकी पार्टी 23 जुलाई को पार्टी की परिषद की बैठक के बाद ही नए नाम यूपीए को दे पाएगा.

चार बड़े विभागों को छुए जाने के संकेत नहीं

इस तरह के भी संकेत मिल रहे हैं कि इस फेरबदल में ‘बड़े ’ चार विभागों को नहीं छुआ जाएगा. जनजातीय मामलों के मंत्री कांति लाल भूरिया को उनकी मंत्रिमंडलीय ज़िम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है.

हाल ही में उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है.

ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उप राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की इच्छा प्रकट कर मंत्रिमंडल से हटने की अटकलों को बढ़ावा दे दिया है. उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव को देखते हुए बेनी प्रसाद वर्मा को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है.

उड़ीसा को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से श्रीकांत जेना को तरक्की दी जा सकती है. छत्तीसगढ़ से भी एक मंत्री को लिए जाने की चर्चा ज़ोरों पर है.

लालू प्रसाद यादव भी मंत्रिमंडल में स्थान पाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस नेतृत्व उनकी इच्छा पूरी करने को तत्पर नहीं दिखाई देता.

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