'फ़र्ज़ी मुठभेड़' की जांच के आदेश

रमन सिंह
Image caption रमन सिंह सरकार ने दो लाख रुपए मुआवज़े की घोषणा की है.

छत्तीसगढ़ की सरकार को लगने लगा है कि राज्य के सरगुजा इलाके में गत पांच जुलाई को हुई पुलिस मुठभेड़ में मारी गई मीना खालको की मौत संदिग्ध है.

सरकार को लगता है कि पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में मारी गई मीना खालको नक्सली नहीं थी.

लोगों के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए हैं.

इस मामले को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने मीना के परिजनों को दो लाख रूपए बतौर मुआवज़ा देने का ऐलान किया है.

जुलाई महीने की पांच तारीख़ को सरगुजा बलरामपुर इलाके में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी.

इस मुठभेड़ के बाद पुलिस नें घटनास्थल से एक बंदूक और कारतूस बरामद करने का दावा किया था.

पुलिस का कहना था कि मुठभेड़ में मीना खालको नमक एक 16 वर्षीय आदिवासी युवती को गोली लगी थी जिसने बाद में अस्पताल ले जाने के क्रम में दम तोड़ दिया.

लेकीन पुलिस का यह दावा सवालों के घेरे में आ गया क्योंकि मीना खालको नें ना तो वर्दी पहन रखी थी और ना ही उसके पास से कोई हथियार बरामद हुआ था.

बलरामपुर जि़ले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा ने दावा किया कि हांलाकि मीना नें नक्सली वर्दी नहीं पहन रखी थी, लेकिन वह मोवाई गुट की एक सक्रिय सदस्य है.

विपक्ष का आक्रोश

घटना के बाद इस मामले नें काफी तूल पकड़ लिया.

इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल नें सरगुजा के पुलिस महानिरीक्षक से मिलकर मामले की जांच कराने की मांग की.

इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमिटी नें सरकार को एक ज्ञापन भी सौंपा है.

कांग्रेस का आरोप है कि मुठभेड़ की बात झूठी है और मीना को पुलिस वालों नें सोच समझ कर मारा है.

बीबीसी से बात करते हुए नंद कुमार पटेल का कहना था, "हमने लोगों से बात की है. सभी का आरोप है कि मीना का संबंध नक्सलियों से नहीं था. उसे सोच समझकर मारा गया."

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में भी बताया गया है कि मीना को पचास-पचास गज़ की दूरी से दो गोलियां मारी गई हैं.

घटना को लेकर खर्चा इलाक़े में काफी आक्रोश है. ना सिर्फ कांग्रेस बल्कि सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता भी आरोप लगा रहे हैं कि मुठभेड़ की बात झूठी है.

न्यायिक जांच के आदेश

लोगों के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार नें मामले की दंडाधिकारी जांच के आदेश दिए हैं.

इसके अलावा सरकार नें चंदो थाना में पदस्थापित एक अवर निरीक्षक सहित बारह पुलिसकर्मियों को हटा दिया है. इन सभी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया है.

लेकिन मुआवज़े की घोषणा से कांग्रेस संतुष्ट नहीं है. पटेल का कहना है कि सरकार सभी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज करे.

वरिष्ठ पत्रकार रूचिर गर्ग ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडुम और एसपीओ के अलावा फ़र्ज़ी मुठभेड़ों पर भी चिंता जताई थी.

इस ताज़ा मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, ''सरकार ने जिस तरह से पुलिस जवानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है और मुआवज़े का ऐलान किया है उससे लगता है कि ये मामला आम मुठभेड़ से कुछ अलग है.''

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