'औद्योगिक उत्पादन सूचकांक प्रोत्साहक नहीं'

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भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने कहा है कि वर्ष 2011 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक प्रोत्साहक नहीं. उन्होंने कहा है कि सरकार ऐसे क़दम उठाने की प्रक्रिया में है, जिससे उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी देखी जाए.

भारतीय अर्थव्यवस्था में आई गिरावट की ओर इशारा करने वाले आंकड़े बताते हैं कि देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में पिछले साल की तुलना में गिरावट आई है.

साल 2010 के मई महीने में जहाँ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 8.5% पर था, तो साल 2011 के मई महीने में ये दर गिर कर 5.6% पर पहुँच चुकी है.

इस गिरावट के प्रमुख कारण निर्माण और खनन क्षेत्र के ख़राब प्रदर्शन बताए गए हैं.

वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने पत्रकारों को बताया, "भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक बहुत उत्साहित करने वाला नहीं है."

हालांकि प्रणब मुख़र्जी ने ये भी कहा कि मासिक आंकड़ों को साल भर का पैमाना मान लेना ग़लत होगा.

उन्होंने कहा, "मासिक और साप्ताहिक विकास दरों को मैं हमेशा एक उदारहण के रूप में नहीं देखता हूँ. कम से कम तिमाही आंकड़ों को ध्यान में रख कर देखा जाना चाहिए."

सुधार के कदम

हालांकि पिछले साल की तुलना में 2011 के औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई है, लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी के मुताबिक़ सरकार इस बाबत कई क़दम उठा रही है.

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार कोशिश में है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढाई जाए.

सरकार का इरादा है कि सकल घरेलू उत्पाद में मौजूदा 16% के निर्माण क्षेत्र के योगदान को बढ़ा कर 25 % तक लाया जाए.

ताज़ा आंकड़े इस बात का भी संकेत देते हैं कि खनन क्षेत्र के विकास में भी गिरावट आई है.

जहाँ 2010 के मई महीने में खनन क्षेत्र में विकास दर 7.9% दर्ज की गई थी, वहीं 2011 के मई महीने में ये विकास दर लुढ़क कर 1.4 % पर आ गई है.

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