उत्सुक लोगों की भीड़

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Image caption दादर के कबूतर खाना इलाके में हुआ धमाका.

ऐसा मालूम होता है कि मुंबई में बम धमाके करने वाले जानबूझ कर शाम का वक्त चुनते हैं जब लोग अपने दफ्तरों से घरों को लौट रहे होते हैं.

जुलाई 2006 में ऐसा ही हुआ था. 2008 में भी रात में हमले हुए थे. और बुधवार को भी शाम सात बजे लगभग 20 मिनट के भीतर तीन धमाके हुए. मैं फ़ौरन दादर पहुंचा, जहाँ तीन में से एक धमाका हुआ था.

एक वाहन को नुकसान पहुंचा था. एक बस अड्डे को भी बुरी तरह से नुकसान पहुंचा था. दादर में कोई दहशत देखने को नहीं मिली. वहां लोगों की बड़ी भीड़ जमा थी.

लेकिन अधिकतर लोग उत्सुकता वश वहां पहुंचे थे. पुलिस की तफ्तीश में उनकी मौजूदगी यकीनन बाधा पहुँचा रही थी.

दुकानें भी खुली थीं और लोग खरीदारी भी कर रहे थे. ऐसा महसूस ही नहीं हो रहा था कि कुछ लोगों में नाराज़गी थी कि मुंबई में बार-बार इस तरह के हमले क्यों होते हैं.

बारिश लगातार हो रही थी जिसके कारण पुलिस के काम में और भी बाधा आ रही थी. धमाके का सुराख़ ढूँढने में कठिनाई हो रही थी. लेकिन एक पुलिस वाले ने कहा की शायद इस गाड़ी से कोई सुराख़ मिले.

परिजनों का बुरा हाल

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Image caption अस्पताल के बाहर शोक में डूबे परिजन

वहाँ से मैं 15 मील दूर जेजे अस्पताल पहुंचा जहां अधिकतर घायल लोग इलाज के लिए भर्ती किए गए थे. रास्ते में जन जीवन सामान्य नज़र आया.

कहीं-कहीं ट्रैफ़िक जाम मिला लेकिन एक घंटे के अन्दर-अन्दर मैं अस्पताल पहुँच गया. पुलिस ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया था. अन्दर जाना असंभव था. घायलों को अब भी एंबुलेंस में यहाँ लाया जा रहा था.

भारतीय जनता पार्टी के एक नेता अस्पताल से निकले और कहा कि ज़ख्मियों की हालत खराब है. अधिकतर लोग धमाके से झुलस गए हैं.

गेट के निकट घायल होने वालों के कई रिश्तेदार खड़े थे इस इंतज़ार में की अस्पताल के अन्दर से कोई अच्छी ख़बर बाहर आए. एक ने कहा उनका भाई अन्दर भर्ती है. एक महिला रो रही थी. उसे उसके रिश्तेदार तसल्ली दे रहे थे की सब ठीक रहेगा.

मीडिया वालों ने उनसे बात करनी चाही लेकिन वो उस वक़्त बात करने की हालत में नहीं थी.

मुंबई पुलिस ने शहर भर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है. जगह-जगह पुलिस की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं. इन धमाकों की अब तक किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

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