‘पाकिस्तान से बातचीत का फ़ायदा नहीं’

आडवाणी
Image caption एल के आडवाणी ने मुंबई के अस्पतालों में घायलों और उनके परिजनों से मुलाक़ात की.

मंबई में धमाकों के बाद स्थिति का जायज़ा लेने पहुंचे भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कांग्रेस की सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि इस हमले को ख़ुफ़िया विभाग की विफलता नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों की विफलता के रूप में देखा जाना चाहिए.

उनका कहना था कि मुंबई चरमपंथियों के लिए एक लोकप्रिय निशाना बनता जा रहा है.

मुंबई में पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा, “अगर आतंकवाद के प्रति हमारी मौजूदा नीति नहीं बदली गई, तो इस प्रकार की घटनाएं होती रहेंगीं. मैं नहीं जानता कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है. अगर इंडियन मुजाहिदीन का इन धमाकों के पीछे हाथ है, तो ये बात भी साफ़ है कि ऐसे गुटों को हर तरह का सहयोग पाकिस्तान से ही मिलता है. जब तक पाकिस्तान चरमपंथ का समर्थन करना बंद नहीं करती, भारत सरकार को पाकिस्तान से किसी तरह की बातचीत नहीं करनी चाहिए.”

साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिस चरमपंथ का पालन-पोषण आज कर रहा है, कल वो ही चरमपंथ उसे खा जाएगा.

आडवाणी ने कहा, “ये साबित किया जा चुका है कि 26/11 के मुंबई हमलों में पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ था, जो पाकिस्तान प्रशासन का ही एक हिस्सा है. भारत को आईएसआई को चरमपंथी संगठन घोषित करवाने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिश करनी चाहिए. ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में पाया जाना ये साबित करता है कि पाक सरकार चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है.”

सरकार का बचाव

लेकिन दूसरी ओर सरकार का बचाव करते हुए कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की कार्रवाई अच्छी रही है.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि गृह मंत्री पी चिदंबरम की अगुआई में सरकार की कार्रवाई तेज़ और फ़ुर्तीली रही है. हर चरमपंथी हमले को रोका नहीं जा सकता, लेकिन पिछले दो सालों में हमारी सरकार ने जो भी क़दम उठाए हैं, वो बेहद उम्दा रहे हैं.”

राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर भाजपा नेता आडवाणी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता प्रफ़ुल्ल पटेल ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इन हमलों से पूरे देश और विदेश में एक ग़लत संदेश गया है.

उन्होंने कहा, “मुंबई में बुधवार को हुए हमले से ये संदेश जाता है कि 1993 के बाद से हर दो या तीन साल बाद मुंबई में चरमपंथी हमले होते हैं. ये बहुत ही ख़राब संकेत है क्योंकि इन हमलों से लगता है कि भारत की आर्थिक गति पर हमला हुआ है. आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकार को बड़े मुख्य शहरों को ऐसे हमलों से बचाने के लिए पुख़्ता क़दम उठाने होंगें.”

मीडिया में आ रहीं ख़बरों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुंबई के लिए रवाना होने वाले हैं.

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