तेलंगाना में रेल यातायात ठप

Image caption तेलंगाना क्षेत्र के नौ ज़िलों में कोई ट्रेन नहीं चली

अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर रेल रोको कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा और पूरे क्षेत्र में गुरुवार को रेल सेवाएं ठप रहीं. न केवल हैदराबाद और इस क्षेत्र के दूसरे नौ ज़िलों में कोई रेल नहीं चल सकी बल्कि इस क्षेत्र से गुज़रनेवाली दूसरे राज्यों की रेलें भी नहीं चल सकीं.

इस आंदोलन का समर्थन करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति के विधायक टी हरीश राव ने कहा,''आज उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल संपर्क कट कर रह गया. हमारा उद्देश्य आम लोगों को कष्ट देना नहीं था बल्कि हम केंद्र सरकार को नींद से जगाना और ये बताना चाहते थे कि तेलंगाना में हर एक व्यक्ति अलग राज्य चाहता है."

संयुक्त समिति ने तेलंगाना राज्य की मांग पर केंद्र सरकार की लापरवाही और ख़ामोशी के विरुद्ध इस कार्यक्रम का आयोजन किया था और लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया.

पटरियों पर कब्ज़ा

Image caption जगह-जगह फंसे रहे लोग

सिकंदराबाद, हैदराबाद और काज़ीपेट जंक्शन समेत सभी बड़े रेलवे स्टेशन तेलंगाना के समर्थकों के नियंत्रण में थे. रेल की पटरियों पर भी उन्हीं का कब्ज़ा था.

कहीं लोग कोई खेल खेल रहे थे तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे और लोग तेलंगाना के लोक गीत गा रहे थे. संयुक्त समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य तेलंगाना की आवाज़ को एक ज़ोरदार अंदाज़ में केंद्र सरकार तक पहुंचाना था.

वारंगल ज़िले में काज़ीपेट स्टेशन पर, जो कि आंध्र और तेलंगाना के बीच एक दरवाज़ा है, लंबी दूरी की कई ट्रेनों को रोक दिया गया जिनमें केरल से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें भी शामिल थीं.

ट्रेनों को रोकने की वजह से हज़ारों यात्री वहां फंसे हुए थे.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के स्थानीय विधायक विनय भास्कर ने फंसे हुए लोगों के खाने-पानी और बच्चों के लिए दूध का प्रबंध किया.

छात्रों का अनशन

दूसरे मोर्चों पर भी तेलंगाना का आंदोलन जारी रहा.

उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों के आमरण अनशन का गुरुवार को चौथा दिन था. तीन छात्रों की हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया. बाक़ी छात्रों को भी अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों ने उसे असफल बना दिया. तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं के 48 घंटों के अनशन का आज दूसरा दिन था.

टीआरएस अध्यक्ष चन्द्रशेखर राव ने वहां जाकर अपना समर्थन प्रकट किया और विश्वास व्यक्त किया कि तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने त्यागपत्र देकर जो क़ुर्बानी दी है वो बेकार नहीं जाएगी.

उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली से ऐसे संकेत मिले हैं कि केंद्र सरकार दो तीन सप्ताह में तेलंगाना पर एक घोषणा करने वाली है.

आगे की रणनीति

वहां मौजूद कांग्रेसी नेताओं ने कहा कि वो तेलंगाना के लिए और भी क़ुर्बानियां देने को तैयार हैं.

Image caption स्टेशनों पर चारों तरफ़ पुलिस तैनात थी

उनमें से एक नेता दामोदर रेड्डी ने केंद्र को चेतावनी दी, ''अगर 31 जुलाई तक तेलंगाना की मांग स्वीकार नहीं की गई तो आंदोलन को और भी तेज़ किया जाएगा और एक करोड़ लोग हैदराबाद को घेर लेंगे''.

उन्होंने कहा कि तेलंगाना और आंध्र को मिलाने वाली सड़कों को खोद डाला जायेगा और तमाम संपर्क काट दिए जाएंगे.

इसी शिविर में आज कांग्रेस के एक वरिष्ठ विधायक मुत्यम रेड्डी की हालत बिगड़ जाने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.

आंध्र क्षेत्र के एक मंत्री थोटा नरसिम्हा का आज तेलंगाना वासियों ने नलगोंडा ज़िले में घेराव किया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले.

उधर, तेलंगाना के सरकारी कर्मचारियों और अध्यापकों ने आज सरकार को नोटिस दी कि तेलंगाना के समर्थन में 1 अगस्त से वो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले हैं.

इसके बाद अब तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति और कार्य योजना तैयार की जाएगी.

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