रिकार्ड चावल उत्पादन के लिए पुरूस्कार

छत्तीसगढ़ (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption नक्सली हिंसा से प्रभावित राज्य के लिए ये एक अच्छी ख़बर है.

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2010-11 में सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पुरूस्कार देने का फ़ैसला लिया है.

यह पुरुस्कार मुख्यमंत्री रमन सिंह 16 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों लेंगे.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है.

राज्य के सूचना और जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि इस उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ के सभी किसान और कृषि तथा सहकारिता से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और कृषि वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं.

बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने यह पुरस्कार राज्य के किसानों को समर्पित किया है.

धान का कटोरा

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है.

कृषि विभाग की ओर से प्रस्तुत किए गए एक प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2010-11 में छत्तीसगढ़ में 61 लाख 59 हजार मेटरिक टन चावल की पैदावार हुई है जबकि इसके पूर्व के वर्ष 2009-10 में राज्य में 41 लाख 10 हजार मीटरिक टन चावल का उत्पादन हुआ था.

पहले वर्ष की तुलना में इस वर्ष चावल के उत्पादन में 20 लाख 49 हजार मेटरिक टन अर्थात लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी रिकार्ड की गई है.

राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य नीति के तहत किसानों से वर्ष 2010-11 में सहकारी समितियों के ज़रिए 51 लाख मेटरिक टन धान ख़रीद कर किसानों को पांच हज़ार करोड़ रूपए से भी अधिक राशि का भुगतान किया है.

बीबीसी से बातचीत करते हुए छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू का कहना है कि किसानों को खेती के लिए जहां सिर्फ़ तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर सहकारी समितियों से ऋण सुविधा दी जा रही है, वहीं उन्हें पांच हार्स पावर तक सिंचाई पंपों के लिए सालाना छह हज़ार यूनिट नि:शुल्क बिजली देने का प्रावधान भी किया गया है.

साहू का कहना है कि समितियों से किसानों को धान के उन्नत और प्रमाणित बीज भी दिए जा रहें हैं और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए छोटे किसानों को सिंचाई उपकरणों के लिए 90 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है.

छत्तीसगढ़ की सरकार ने वित्तीय वर्ष 2011-12 में कृषि विभाग के लिए 985 करोड़ रूपए का बजटीय प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है.

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