दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

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Image caption याचिकाकर्ता ने इस मामले में एक ख़ास जांच टीम यानि एसआईटी गठित करने की मांग की है.

2008 में हुए ‘वोट के बदले नोट’ मामले में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपर्याप्त बताया है और पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के रवैये को ‘संवेदनहीन’ बताते हुए सवाल किया कि इस मामले से जुड़े लोगों की हिरासत में हुई पूछताछ के बिना उन्होंने अपनी रिपोर्ट कैसे दायर की.

जस्टिस अफ़ताब की वाली खंडपीठ ने कहा, “हम दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से कतई संतुष्ट नहीं हैं. इस तरह के गहन जुर्म को साबित करने का ये कोई तरीका नहीं है. पिछले दो सालों में इस मामले में कोई पुख़्ता तरक्की नहीं हुई है. हम बेहद चिंतित हैं. इस मामले में तेज़ कार्रवाई होनी चाहिए और फिर कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए.”

दरअसल 22 जुलाई 2008 में जब वामदलों ने कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, उसके बाद लोक सभा में हुए विश्वास मत के दौरान तीन भाजपा सांसदों ने करोड़ों रूपए दिखा कर ये दावा किया था कि यूपीए सरकार ने उनका मत हासिल करने के लिए उन्हें रिश्वत दी थी.

जिन तीन भाजपा सांसदों ने कांग्रेस पर ये आरोप लगाए थे, वे थे अशोक अरगल, फ़ग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोड़ा.

पूर्व चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि इस घोटाले में शामिल नेताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.

जैसे ही ये मामला कोर्ट में सुनवाई के लिए आया, न्यायधीशों ने दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर आश्चर्य ज़ाहिर किया.

एसआईटी की मांग

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “ये कोई जांच नहीं है. केवल कुछ लोगों के बयान के आधार पर आप हमें एक कहानी सी बता रहे हैं. इस रिपोर्ट में कोई निष्कर्ष निकल कर नहीं आया है. इस मामाले में जांच के दौरान बेहद संवेदनाहीन रवैया अपनाया गया है.”

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वो दो सप्ताहों के भीतर एक ताज़ा रिपोर्ट पेश करे.

पूर्व चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने अपनी याचिका में कहा था कि भाजपा सांसदों के लोक सभा में पैसे उछालने की हरकत ने पूरे देश को सख़्ते में डाल दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

अपनी याचिका में उनका कहना है कि न तो दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस बाबत एफ़आईआर दर्ज की, और न ही संयुक्त संसदीय समिति ने इस मामले में कोई कार्रवाई की.

उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि वो सरकार को इस मामले में एक ख़ास जांच टीम यानि एसआईटी गठित करने का आदेश दे.

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