माया सरकार को एक और झटका

भट्टा परसौल इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उपजाऊ कृषि भूमि का जबरन अधिग्रहण कर उसे निजी बिल्डरों को देने के मामले में मायावती सरकार को अदालत से एक और झटका लगा है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन के पतवारी गाँव में ग्रेटर नोएडा अथारिटी द्वारा 590 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण रद्द कर उसे किसानों को लौटाने का फैसला किया है.

कोर्ट के इस फैसले से डेढ़ हजार से अधिक किसानों का फायदा होगा. साथ ही अदालत के इस फैसले से उन हजारों लोगों को मायूसी मिली है, जिन्होंने बैंक से कर्ज़ लेकर करीब डेढ़ दर्जन निजी निर्माण कंपनियों से फ्लैट बुक कराए थे.

राज्य सरकार ने अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल कर यह जमीन सुनियोजित विकास के सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अधिग्रहीत की थी. राज्य सरकार ने आपात क़ानून का सहारा लेकर किसानों को सुनवाई के मौलिक अधिकार से भी वंचित कर दिया था.

सरकार ने यह ज़मीन जबरन किसानों से लेकर करीब डेढ़ दर्जन बिल्डर्स को सौंप दी थी. इनमें आम्रपाली, सुपरटेक, अजनारा, पटेल, अरिहंत और निराला जैसी कंपनियाँ शामिल हैं.

कानून का दुरूपयोग

किसानों ने जबरन भूमि अधिग्रहण और कम मुआवजे के खिलाफ अदालत में याचिकाएं दाखिल की. मगर इन कंपनियों ने कोर्ट के फैसले का इंतज़ार किए बिना रिहायशी फ्लैटों की बुकिंग और निर्माण कार्य चालू कर दिया.

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और ग्रेटर नोएडा अथारिटी की इस कार्यवाही को कानून का दुरूपयोग मानते हुए कड़ी फटकार लगायी है. अदालत ने यह भी सवाल उठाया है कि किसानों का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा.

अदालत में सुनवाई के दौरान बिल्डर्स ने भी अपना पक्ष रखा, लेकिन अदालत ने उसे महत्व नही दिया. दरअसल इस मामले में बिल्डर्स और माया सरकार की सांठगांठ सबको मालूम है. यह भी आरोप लगते रहे हैं कि इस धंधे में सत्ताधारी लोग शामिल हैं.

दो महीने से कम समय में हाईकोर्ट का यह तीसरा फैसला है जिसमे ग्रेटर नोएडा में कृषि भूमि का अधिग्रहण रद्द कर जमीन किसानों को वापस करने आ आदेश हुआ है.

इससे पहले मई महीने में शाह्बेरी और गुलिस्तानपुर गाँवों में इसी तरह का जमीन अधिग्रहण रद्द किया गया था.

कुछ बिल्डर्स और ग्रेटर नोएडा अथारिटी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने और भी कदा रुख अपनाते हुए किसानों को जमीन वापस दिलाने के साथ ही ग्रेटर नोएडा अथारिटी पर दस लाकह रूपये का जुर्माना किया था.

संबंधित समाचार