डॉक्टरों की हत्या की सीबीआई जांच

डॉ सचान
Image caption इससे पहले राज्य सरकार डॉ सचान की हत्या की जांच भी सीबीआई को दे चुकी है

मायावती सरकार ने हाईकोर्ट के दबाव में आख़िरकार परिवार कल्याण विभाग के दोनों मुख्या चिकित्सा अधिकारियों डा.बीपी सिंह और डा.विनोद कुमार आर्य की हत्या की जांच भी सीबीआई को देने की सिफ़ारिश कर दी है.

इसके अलावा सीएमओ परिवार कल्याण लखनऊ कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी सीबीआई को सौंपी जा रही है.

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ये फ़ैसला इसलिए किया है ताकि सीबीआई डिप्टी सीएमओ डा.योगेन्द्र सिंह सचान की हत्या के मामले की तह में जा सके और अगर डा. आर्या और डा.सिंह की हत्या का डा. सचान की हत्या से कोई सम्बन्ध है तो यह सच भी उजागर हो सके.

प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने इन फैसलों के सम्बन्ध में सीबीआई को पत्र भेज दिया गया है.

पुलिस की कार्रवाई

इससे पहले राज्य पुलिस ने इन चारों मामलों में विवेचना करके आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए हैं. पुलिस ने डा.विनोद आर्य हत्याकांड में पहले पकड़े गए चार लोगों को निर्दोष बताकर उन्हें रिहा भी करवा दिया है.

राज्य सरकार का कहना है,"इन मामलों की अग्रेतर विवेचना इस आशय से सीबीआई को सौंपी गई है कि यदि डा. सचान की हत्या के मकसद का सम्बन्ध इन मामलों से हो तो वह सामने आ सके, और डा. सचान की हत्या में संलिप्त सभी दोषियों के नाम उजागर हो सके."

राज्य सरकार का ये निर्णय उसके रुख में अचानक परिवर्तन है.

डा. आर्य और डा. बीपी सिंह का परिवार शुरू से उनकी हत्या की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रहा था. और विपक्ष राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के लखनऊ एवं अन्य कार्यालयों में भ्रष्टाचार की जांच भी सीबीआई से करवाने की मांग कर रहा है.

लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार तैयार नही हुई.

यहाँ तक कि इस सम्बन्ध में एक जनहित याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भी राज्य सरकार सीबीआई जांच के लिए सहमत नही थी.

इस पर अदालत ने सारे कागजात तलब कर शुक्रवार को फिर सुनवाई तय की थी.

समझा जाता है कि राज्य सरकार को ये समझ में आ गया कि कोर्ट इन सभी मामलों में सीबीआई जांच का आदेश कर देगी. इसलिए उसने श्रेय लेने के लिए स्वयं ही सीबीआई को पत्र लिख दिया.

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