'पैसा वापस नहीं, मकान चाहिए'

नोएडा एक्सटेंशन

नोएडा एक्सटेंशन में किसानों को ज़मीन लौटाने के हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद परेशान हो रहे मकान मालिकों ने शनिवार को प्रदर्शन किया.

इस बीच नोएडा एक्सटेंशन की आग अब एक्सप्रेस वे तक पहुँच गई है और वहाँ के किसानों ने मुआवज़ा बढ़ाने और पाँच प्रतिशत विकसित ज़मीन की मांग पर प्रदर्शन शुरु कर दिया है.

उधर शाहबेरी गाँव में किसानों को उनकी ज़मीन लौटाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है और आदेश दिए गए हैं कि जो किसान मुआवज़ा ले चुके हैं उन्हें पैसे लौटाने होंगे.

दो ज्ञापन

गौतम बुद्ध नगर में क़रीब दो हज़ार मकान मालिकों ने प्राधिकरण को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि वे अपने पैसे वापस नहीं चाहते बल्कि वे मकान चाहते हैं.

नोएडा एक्सटेंशन के मकान मालिकों ने नोएडा एक्सटेंशन फ़्लैट बायर एसोसिएशन के नाम से एक संगठन बनाया है और इसी के तहत अब वे आगे क़ानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं.

उधर नोएडा एक्सप्रेस वे के किसानों ने प्रशासन को 31 जुलाई तक का समय देते हुए कहा है कि यदि इस इलाक़े में विकसित की गई ज़मीन में से पाँच प्रतिशत उन्हें नहीं दिया गया तो वे आसपास की सारी परियोजनाओं में काम नहीं होने देंगे.

नोएडा एक्सप्रेस वे के पास लगातार तीसरे दिन आंदोलन कर रहे किसानों ने एकत्रित होकर प्रदर्शन किया.

उनका कहना है कि वर्ष 2003 में जब उनकी ज़मीन अधिग्रहित की गई थी तब उनसे कहा गया था कि डवलपमेंट के बाद यानी विकसित किए जाने के बाद पाँच प्रतिशत ज़मीन उन्हें लौटा दी जाएगी लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया है.

उनका कहना है कि उस समय प्रशासन ने 361 रुपए प्रति वर्ग फ़ुट की दर से भुगतान किया गया था और अब वे ज़्यादा मुआवज़ा चाहते हैं.

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी समस्या का शीघ्र ही समाधान कर दिया जाएगा और उन्हें पाँच प्रतिशत ज़मीन दे दी जाएगी.

मुआवज़े के बारे में अधिकारियों ने कहा है कि इसके बारे में उत्तर प्रदेश सरकार ही कोई फ़ैसला ले सकती है.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.