नोएडा के किसान भी एकजुट हुए

एक्सप्रेस वे

ग्रेटर नोएडा के कुछ गांवों के किसानों की अधिग्रहित ज़मीन वापस करने के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले के बाद अब नोएडा के किसानों में भी उम्मीद जगी है.

नोएडा के 54 गांवों के किसान अब संगठित होकर अपनी मांगे अदालत के बाहर सड़कों पर उठा रहे हैं.

इनका दावा है कि वर्ष 2000 से उद्योग के निर्माण के लिए आपातकाल धारा लगा कर उनकी ज़मीनें बहुत कम दाम पर अधिग्रहित की गईं थी.

लेकिन ये ज़मीनें नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक जाने वाले एक्सप्रेसवे के आसपास निजी कंपनियों को निर्माण के लिए बेच दी गईं.

एक्सप्रेसवे से सटे गांव नंगली से मनोज चौहान बताते हैं, “हमने ज़मीन इसलिए दी थी कि वहां लगने वाले उद्योग से हमारे बच्चों को व्यवसाय मिले, लेकिन प्राधिकरण और सरकार ने मिलकर हमसे धोखा किया, हमसे ज़मीन 329 रुपए प्रति गज में ली और बिल्डर को 21,000 प्रति गज पर दी.”

मनोज के साथ सैंकड़ों किसान ऐसी शिकायतों के साथ सोमवार को नोएडा के गेझा गांव में जुटे.

इनका कहना है कि इनमें से कई ने नोएडा प्राधिकरण के ख़िलाफ अदालत में केस दर्ज़ किए हुए हैं और अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इन्हें न्याय की उम्मीद भी बढ़ गई है.

लेकिन ये संगठित हो, एक साथ नोएडा प्राधिकरण से समझौता करना चाहते हैं.

नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बलविंदर कुमार ने नोएडा के एक अन्य गांव में हो रही पंचायत में किसानों को वादा किया कि वे उनके इलाक़ों के विकास के लिए सात करोड़ रुपए देंगे. लेकिन मुआवज़े की मांग पर कुछ ठोस नहीं कहा.

सड़कों पर प्रदर्शन की चेतावनी

इनके साथ ग्रेटर नोएडा के वो किसान भी थे, जिनकी ज़मीनें वापस करने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय दे चुका है.

इन किसानों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कहा है कि वे ज़मीनों के बदले मिला मुआवज़ा वापस कर दें तो ज़मीनें फिर से उनके नाम कर दी जाएंगी.

लेकिन किसानों की मांग है कि ज़मीन पर निर्माण कार्य किए जाने की वजह से उसे फिर से उपजाऊ बनाने में बड़ा ख़र्च आएगा, जो प्राधिकरण को उठाना चाहिए.

होशियारपुर गांव के रहने वाले इंदर सिंह कहते हैं कि, “ज़मीन में से कंक्रीट, लोहा इत्यादि निकाल दिया जाए, ज़मीन के जल स्तर 70 फुट हो गया है, उसे वापस 15 फुट तक लाया जाए, तो हम उनका पैसा वापस दे देंगे.”

किसानों के संगठन, “भूमि अधिग्रहण प्रतिरोध आंदोलन” के दलबीर सिंह यादव के मुताबिक़ किसान बातचीत से हल निकालना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने प्राधिकरण को पांच अगस्त तक का समय दिया है, वो हमसे समझौता करने की कोशिश करें, तो हो सकता है हम बाज़ार के मोल पर अतिरिक्त मुआवज़े के एवज़ में ज़मीनें उनके पास रहने दें.”

लेकिन साथ ही उनका कहना है कि अगर प्राधिकरण किसानों की मांगे नहीं मानता तो किसान सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन को उग्र कर अपनी आवाज़ उठाएंगे.

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