राजा का बयान सबूत नहीं-प्रणब

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Image caption ब्रिटिश वित्तमंत्री आवास 11 डाउनिंग स्ट्रीट पर जॉर्ज ओसबोर्न के साथ प्रणब मुखर्जी

भारतीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी की मनमोहन सिंह और पी चिंदबर के इस्तीफ़े की माँग के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में पूर्व संचार मंत्री ए राजा के दावों को सबूत नहीं समझा जा सकता.

लंदन में भारतीय उच्चायोग में एक संवाददाता सम्मेलन में प्रणब मुखर्जी ने कहा,"मुझे नहीं पता उन्होंने क्या सबूत दिए हैं, जहाँ तक मुझे पता है उन्होंने कोई बयान दिया है, ब्यौरा देखना पड़ेगा मगर मुझे लगता है जो उन्होंने कहा है उसे केवल बयान समझा जाएगा, सबूत नहीं."

उन्होंने कहा कि ये मामला अदालत में है और इस बारे में कोई भी फ़ैसला अदालत को करना है.

उल्लेखनी है कि राजा ने अपने बचाव में सीबीआई की विशेष अदालत में कहा है कि उन्होंने स्पेक्ट्रम लाइसेंसों के वितरण के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम के साथ चर्चा की थी.

ए राजा को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में हुए कथित भ्रष्टाचार में अपनी भूमिका के लिए दो फ़रवरी को गिरफ़्तार किया गया था और वे इस मामले में 14 अभियुक्तों के साथ तिहाड़ जेल में बंद हैं जिनमें डीएमके सांसद कनिमोड़ी भी शामिल हैं.

प्रणब मुखर्जी ने स्पेक्ट्रम बँटवारे में अपनी भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस बारे में उनकी भूमिका बेहद सीमित थी.

उन्होंने बताया कि उन्होंने स्पेक्ट्रम बँटवारे को लेकर रक्षा मंत्रालय और संचार मंत्रालय के बीच के एक विवाद को हल करवाया था.

प्रणब मुखर्जी ने कहा,"संचार मंत्रालय ने शिकायत की थी कि रक्षा मंत्रालय ने अच्छी खासी मात्रा में स्पेक्ट्रम पर कब्ज़ा किया हुआ है इसलिए मेरी अध्यक्षता में एक समिति गठित हुई थी जिसमें संचार और रक्षा दोनों मामलों के मंत्री शामिल थे.

"मैं तब विदेश मंत्री था, अपने कार्यकाल के अंतिम दिन मैंने वो मुद्दा सुलझा दिया और स्पेक्ट्रम खाली कर दिया गया, इससे ज़्यादा मेरी कोई भूमिका नहीं."

महँगाई

वित्तमंत्री ने कहा कि भारत में हाल के समय में मुद्रास्फ़ीति की दर में गिरावट आई है लेकिन वो अभी भी संतोषजनक स्थिति में नहीं है और महँगाई को नियंत्रित करने के लिए और क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.

प्रणब मुखर्जी ने कहा,"मुद्रास्फीति में गिरावट आई है मगर वो अभी भी स्वीकार्य स्थिति में नहीं है. खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फ़ीति जो 2010 में 22 प्रतिशत पर चली गई थी वो जुलाई में घटकर 8 प्रतिशत के आस-पास रह गई है, मगर इसे 5-6 प्रतिशत पर आना चाहिए."

पिछले 16 महीनों में रिज़र्व बैंक के कई बार ब्याज़ दर बढ़ाने के बारे में उन्होंने कहा कि दरों को बढ़ाते समय ये ध्यान रखा जा रहा है कि इससे जायज़ निवेश प्रभावित ना हो.

उन्होंने कहा,"पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण आर्थिक विकास को नहीं गिरने देने के लिए जो प्रोत्साहन दिए गए थे उनमें कटौती करना ज़रूरी है इसलिए दरों को व्यवस्थित करना ज़रूरी हो गया था."

वित्तमंत्री ने साथ ही उम्मीद जताई कि इस वित्तीय वर्ष में आर्थिक विकास की दर नौ प्रतिशत के आस-पास रह सकती है.

ब्रिटेन के वित्तमंत्री जॉर्ज ओसबॉर्न के साथ हुई अपनी मुलाक़ात को उत्साहजनक बताते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि इसमें आपसी महत्व के मुद्दों के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के बारे में भी चर्चा हुई और इसमें यूरो मुद्रा वाले क्षेत्रों के संकट का मुद्दा भी उठा.

उन्होंने बताया कि दोनों देश जी-20 संगठन को और मज़बूत किए जाने के बारे में भी सहमत थे जो कि कुल वैश्विक अर्थव्यवस्था के 85 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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