भारत-पाक बैठक: विश्वास बहाली के मुद्दे तय

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Image caption भारत-पाक विदेश सचिवों ने मंगलवार को दिल्ली में बातचीत के विषयों को तय किया.

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बुधवार बैठक से पहले भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों ने विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों के बीच पिछले महीनों में हुई चर्चाओं की समीक्षा कर द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भरोसा बहाल करने के लिए उठाए जानेवाले क़दमों को अंतिम रूप दिया है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि विदेश सचिवों ने पिछले दिनों विभिन्न स्तर पर हुई बातचीत का जायज़ा लिया जिसका ब्योरा वो बैठक के पहले अपने-अपने विदेश मंत्रियों को देंगे.

विष्णु प्रकाश ने कहा कि दोनों विदेश मंत्री बुधवार को बातचीत के लिए मिलेंगे.

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने दिल्ली पहुंचकर कहा कि वो पाकिस्तानी सरकार और जनता की ओर से शुभकामनाएँ लेकर भारत आई हैं.

पाकिस्तान की पहली महिला विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत और पाकिस्तान को इतिहास से सबक़ लेना चाहिए लेकिन उन्हें इसके बोझ तले दबने की ज़रूरूत नहीं है.

हिना रब्बानी खर ने कहा, "हम वैसे अच्छे पड़ोसियों की तरह आगे बढ़ सकते हैं, जिनका भविष्य एक दूसरे पर निर्भर करता है और जो क्षेत्र के लिए अपनी ज़िम्मेदारियों को समझते हैं."

दिल्ली में अपनी मौजूदगी के दौरान पाकिस्तानी विदेश मंत्री सुबह में भारतीय दल के साथ बैठक समाप्त करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके निवास स्थान 10 जनपथ और फिर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से मिलेंगी.

प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह से उनकी मुलाक़ात शाम में तय है.

रिहाई

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Image caption पाकिस्तानी विदेश मंत्री मंगलवार को दिल्ली पहुंची.

हालांकि इसकी बहुत चर्चा नहीं हुई लेकिन विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले दोनों देशों ने क़ैदियों को रिहा किया, जिनमें से ज्यादातर मछुआरे थे.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने सुत्रों के हवाले से कहा है कि कुछ भरोसा बहाल करने वाले क़दमों की घोषणा की जाएगी और दोनों देश कोशिश करेंगें कि नागरिक संबंधो को किस तरह बढ़ावा दिया जाए.

मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक के दौरान दोनों विदेश सचिवों के बीच साल 2008 के मुंबई हमलों पर भी चर्चा हुई जिसके दौरान भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव ने कहा कि अनूकूल राय क़ायम करने के लिए पाकिस्तान में हमलों में शामिल लोगों पर चल रहे मुक़दमे पर जल्द फैसला होना चाहिए.

साल 2008 के हमलों के बाद दोनों देशों के बीच जारी समग्र वार्ता पर विराम लग गया था और बातचीत का दौर दुबारा से हाल में ही शुरू किया गया है.

'भरोसे की कमी'

दिल्ली पहुंचने के बाद भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाक़ात कर पाकिस्तान की विदेश मंत्री ने ये तो साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान कश्मीर का मुद्दा उठाने से नहीं चुकेगा.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने राजनयिक मामलों के जानकार सी राजा मोहन के हवाले से कहा है कि दोनों देश अफ़ग़ानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और उसपर जिस तरह की चर्चा होती है वो आनेवाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों को परिभाषित करेगा.

हालांकि लंदन स्थित एशिया मामलों के विशेषज्ञ अलेंगज़ेंडर नील का कहना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की इतनी कमी है कि वार्ता किसी बड़े सार्थक नतीजे पर नहीं जाएगी.

उम्मीद की जा रही है कि भारत-प्रशासित और पाक-प्रशासित कश्मीर के बीच व्यापार और आवागमन में कुछ और ढील दी जाएगी लेकिन चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई जैसे बड़े मुद्दे पर बातचीत के किसी ठोस नतीजे पर पहुंच पाने की आशा नहीं है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भारत के पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह के हवाले से कहा है, "इस मामले में बातचीत का मतलब युद्ध के लिए नहीं जाना है. ये बातचीत मामलों को सुलझाने के लिए नहीं है बल्कि दुनियां को ये बताने के लिए है कि हम युद्ध के लिए नहीं जा रहे हैं."

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