सांप्रदायिकता और आतंकवाद हैं बड़ी चुनौती: मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने कहा कि देश को सांप्रदायिकता और आतंकवाद से होने वाले नुकसान से मिल कर लड़ना होगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांप्रदायिकता और आतंकवाद को भारत की एकता के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा है कि पारस्परिक सहिष्णुता की परंपरा का निर्वाहन आगे भी करना होगा.

राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को राष्ट्रीय सांप्रदायिक समन्वय पुरस्कारों के वितरण के दौरान दिए गए एक संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया.

मनमोहन सिंह का कहना था कि देश को कुछ 'भ्रमित' लोगों की वजह से 'ख़राब उपाधि' मिलती हैं और देश को सांप्रदायिकता और आतंकवाद से होने वाले नुकसान से मिल कर लड़ना होगा.

मनमोहन सिंह ने कहा, "साम्प्रदायिकता और आतंकवाद हमारी एकता और हमारी अखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं. हमारे समाज के कुछ बहके हुए लोग इसे बढ़ावा देते हैं. लेकिन इसकी वजह से पूरे समाज और देश को ख़राब संज्ञाएँ मिलतीं हैं."

इस समस्या के हल की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें इस चुनौती से निपटने के लिए मिल कर काम करना होगा. हमें हर समय सजग रहने की भी ज़रुरत है."

'सांप्रदायिक सौहार्द की ज़रुरत'

महात्मा गांधी के विचारों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता हासिल करने की हमारी कामना तभी पूरी होगी जब दिल खोलकर एक दूसरे के साथ प्यार बांटने का जस्बा मौजूद रहेगा.

मनमोहन सिंह ने देश के समक्ष चुनौतियों पर भी बात की और कहा, "भारत में परस्पर सहिष्णुता और सांप्रदायिक सौहार्द की पुरानी परंपरा रही है. देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए हमें इन चीज़ों का पालन करना ही होगा."

इसी समारोह में भाग लेते हुए भारत के उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि सांप्रदायिक अस्थिरता वाली स्थिति में सरकार और देश को हस्तक्षेप करना ही पड़ता है.

हामिद अंसारी का मत था कि इस तरह के हस्तक्षेप या तो सुधारक हो सकते हैं या फिर बचावकारी.

संबंधित समाचार