कर्नाटक भाजपा अब चुनेगी नया नेता

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Image caption येदियुरप्पा के बाद अब भाजपा को विधायक दल का नया नेता चुनना होगा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफ़ा देने को राज़ी होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी विधायक दल को नए नेता का चुनाव करना है.

इस पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखने के लिए दिल्ली से वरिष्ठ नेता अरुण जेटली और राजनाथ सिंह बंगलौर पहुँच रहे हैं.

येदियुरप्पा, आगामी 31 जुलाई को राज्य के गवर्नर एचआर भारद्वाज को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे. इससे पहले जब पार्टी के संसदीय बोर्ड ने उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा था तो अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया था कि येदियुरप्पा इस्तीफ़ा देंगे या विद्रोह करेंगे.

माना जा रहा है कि येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के नए दावेदार को चुनने में अपनी स्पष्ट भूमिका चाहते थे और यही वजह है कि उन्होंने इस्तीफ़े की घोषणा में देर की. जानकारों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी भी उनकी सहमति से नया उम्मीदवार चुनकर उनके लिए पद छोड़ने की तल्खी को कम करना चाहती है.

येदियुरप्पा की इस घोषणा के बाद अब मुख्यमंत्री पद के लिए नया दावेदार चुनने की कवायद तेज़ हो गई है.

'एकमत से फ़ैसला'

कर्नाटक के ज़रिए दक्षिण भारत का द्वार खोलने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अवैध खनन के मामले में राज्य के लोकायुक्त की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से इस्तीफ़ा देने को कहा था.

भाजपा के संसदीय बोर्ड की गुरुवार को नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद पार्टी नेता रविशंकर प्रसाद ने बताया, "संसदीय बोर्ड ने कर्नाटक में विधायक दल का नेता बदलने का एकमत से फ़ैसला किया है."

प्रसाद के अनुसार, "संसदीय बोर्ड ने मौजूदा मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से तुरंत इस्तीफ़ा देने के लिए कह दिया है. पार्टी नेता अरुण जेटली और राजनाथ सिंह बंगलौर जाएँगे जहाँ पार्टी विधायक दल के नए नेता का चुनाव होगा."

इससे पहले कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़ ने अवैध खनन से जुड़ी अपनी रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को सौंपी थी.

भाजपा की मजबूरी

येदियुरप्पा कुर्सी बचाने की कोशिश में दिल्ली में डेरा डाले थे मगर जल्द ही वह बंगलौर लौट गए. उसके बाद पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के घर पर दिल्ली में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में येदियुरप्पा से छुटकारा पाने का फ़ैसला किया गया.

भाजपा ने पिछले दिनों टू-जी में भ्रष्टाचार के मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित उनके मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों को निशाना बनाया है ऐसे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पर आई लोकायुक्त की रिपोर्ट पार्टी के लिए गले की फाँस बन गई.

मॉनसून सत्र से पहले इस तरह की रिपोर्ट के बाद भाजपा के लिए सत्र के दौरान कांग्रेस को घेरना मुश्किल हो सकता था और माना जा रहा है कि उससे बचने के लिए पार्टी ने येदियुरप्पा को इस्तीफ़ा देने के लिए कहना ही बेहतर समझा.

वैसे येदियुरप्पा ने पहले तो कहा था कि वह पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता के तौर पर हर फ़ैसले का पालन करेंगे मगर पद से हटाए जाने का फ़ैसला आने के बाद उन्होंने पार्टी के विधायकों से मुलाक़ात शुरू कर दी जिससे भाजपा के लिए स्थिति असहज नज़र आने लगी थी.

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