संसद के दोनों सदन स्थगित

Image caption प्रधानमंत्री के विपक्ष से सहयोग की अपील के बावजूद, राज्य सभा में सत्र के पहले ही दिन विरोध हुआ.

मॉनसून सत्र के शुरु होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर उम्मीद जताई थी कि संसद के इस सत्र में ज़्यादा काम हो सकेगा. उन्होंने इसके लिए विपक्ष से सहयोग की अपील की.

लेकिन पिछले सत्र की ही तरह, संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत में भी विपक्ष की ओर से विरोध की आवाज़ें बुलंद हुईं.

लेकिन बात कुछ आगे बढ़े इससे पहले ही, लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल और पांच अन्य सांसदों को श्रद्धाजंलि देने के बाद लोक सभा की कार्रवाई को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया.

राज्य सभा को भी विपक्ष के विरोध के चलते पहले बारह बजे तक स्थगित किया किया. लेकिन इसके बाद भी विपक्ष की ओर से भूमि अधिग्रहण क़ानून लाने के नारे लगाए गए और कामकाज नहीं चलने दिया गया.

आखिरकार कुछ दस्तावेज़ सदन के पटल पर रखे जाने के बाद राज्य सभा के सभापति हामिद अंसारी ने सदन को मंगलवार तक स्थगित कर दिया.

'ये सत्र हो लाभकारी'

मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले संसद के बाहर प्रधानमंत्री ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन मामलों पर अदालत में सुनवाई चल रही है उन पर अदालत को ही फैसला करने देना चाहिए.

उन्होंने कहा, “मैं विपक्ष से दरख़्वास्त करता हूं कि वो इस समय देश के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार का साथ दें.”

प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि ये सत्र पिछले सत्र से ज़्यादा लाभकारी होगा.

वैसे इस सत्र में एक बार फिर विपक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर सकती है. साथ ही अलग तेलंगाना राज्य की माँग, माओवादी हमले, काला धन और ज़मीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है.

जनलोकपाल विधेयक भी मॉनसत्र के दौरान पेश किया जाना है. मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि वो विधेयक पेश किए जाने का विरोध नहीं करेगी हालांकि वे सरकारी मसौदे से सहमत नहीं है.

ये मु्द्दा सरकार के लिए जटिल साबित हो सकता है क्योंकि सत्र के दौरान 16 अगस्त से अन्ना हज़ारे ने इसे लेकर आमरण अनशन का आह्वान किया हुआ है.

मॉनसून सत्र पाँच हफ़्तों तक चलेगा और ये आठ सितंबर को ख़त्म होगा.

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