हैदराबाद में भर्ती पर विवाद बढ़ा

आंध्र प्रदेश
Image caption आंध्र में फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में सरकारी नौकरियों में भर्ती पर चला आ रहा क्षेत्रीय विवाद और भी जटिल हो गया है.

जहाँ तेलंगाना वालों की मांग है कि हैदराबाद में इन नौकरियों पर केवल तेलंगाना क्षेत्र के लोगों को लिया जाए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने यह कह कर राज्य सरकार की परेशानियाँ बढ़ा दी है कि इस विषय पर राज्य विधान सभा को एक और प्रस्ताव पारित करना होगा.

लेकिन मुख्या मंत्री किरण कुमार रेड्डी ने चिदंबरम के इस सुझाव को रद्द कर दिया है.

नौकरियों में तेलंगाना के लोगों के हितों की रक्षा के लिए 1975 में राष्ट्रपति का जो अध्यादेश जारी किया गया था उसकी धरा 14 एफ़ अब भी एक बड़े विवाद का कारण बनी हुई है.

क्योंकि इसमें हैदराबाद नगर को एक ऐसा फ्री ज़ोन बताया गया है, जहाँ तेलंगाना और आंध्र दोनों ही क्षेत्रों के लोग नौकरी कर सकते हैं.

हंगामा

अब जबकि इसी महीने के अंत में हैदराबाद में पुलिस सब इंस्पेक्टर्स की भर्ती होने वाली है, इस विषय पर एक बड़ा हंगामा उठ खड़ा हुआ है.

तेलंगाना समर्थक दलों और संगठनों ने कहा है कि हैदराबाद में इन नौकरियों में केवल तेलंगाना के युवाओं को ही लिया जाए लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार धारा 14 एफ़ को नहीं निकलती, वो कुछ भी नहीं कर सकती.

तेलंगाना समर्थक संगठनों ने धमकी दी है कि अगर इस धारा को निकाले बिना ही सब इंस्पेक्टर्स की भर्ती होती है तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे. अब इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी टकराव शुरू हो गया है.

तेलंगाना के नेता केंद्र सरकार पर लगातार इस बात के लिए दबाव दाल रहे हैं कि राष्ट्रपति के अध्यादेश में संशोधन किया जाए, लेकिन अब तक केंद्र ने इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया है. इन नेताओं में कांग्रेस के सांसद और अन्य नेता भी शामिल हैं.

हालाँकि एक वर्ष पहले ही आंध्र प्रदेश विधान सभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र को भिजवाया था और मांग की थी कि धारा 14 एफ़ को निकाला जाए.

एक वर्ष तक इस प्रस्ताव पर कुछ न करने वाली केंद्र सरकार ने अब यह कहना शुरू किया है कि आंध्र प्रदेश विधान सभा को फिर एक बार ऐसा ही प्रस्ताव पारित करना होगा.

इनकार

चिदंबरम ने कहा कि ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है कि गत एक वर्ष के दौरान हालात काफ़ी बदल चुके हैं. इधर मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी ने एक प्रस्ताव पारित करवाने से इनकार कर दिया है.

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Image caption किरण कुमार रेड्डी ने नए प्रस्ताव से इनकार किया है

उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिख कर कहा है कि विधान सभा पहले ही एक प्रस्ताव पारित करके यह मांग कर चुकी है.

चिदंबरम के रुख़ ने तेलंगाना के सभी नेताओं को उत्तेजित कर दिया है. तेलंगाना से कांग्रेस के सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर मांग की कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और चिदंबरम को इस तरह की बातें करने से रोकें. तेलंगाना के एक वरिष्ठ मंत्री पोन्नाला लक्ष्म्या ने कहा कि चिदंबरम का वक्तव्य अर्थहीन है क्योंकि जिस विधानसभा ने यह प्रस्ताव पारित किया, उसका कार्य काल 2014 तक है.

तेलुगू देसम के वरिष्ठ नेता जनार्दन रेड्डी ने कहा कि चिदंबरम का वक्तव्य असंवैधानिक है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेता बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि चिदंबरम को संसदीय लोकतंत्र का सम्मान करना नहीं आता, इसलिए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्ख़ास्त कर देना चाहिए.

एक ऐसे समय जबकि तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर आंध्र प्रदेश में पहले ही एक राजनैतिक संकट चल रहा है, नौकरियों में भर्ती का यह विषय भावनाओं को और भी भड़काने का कारण बन गया है.

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