डॉयलॉग और शेर का सहारा

Image caption महंगाई पर सरकार का पक्ष रखते हुए सलमान खुर्शीद ने शेरों और डॉयलोगों को मिलाया.

महंगाई पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने शेरो शायरी और फ़िल्मी डॉयलॉग का साथ लिया लेकिन अपेक्षित प्रभाव छोड़ नहीं पाए.

खुर्शीद ने भाषण के शुरुआत में ही कहा कि बज्म में वो आए कि चिरागों में रोशनी न रही. शेर से वो जताना चाह रहे थे कि बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा के भाषण से वो सलाह मशविरा और रोशनी चाह रहे थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

भाषण के दौरान जब उन्होंने आकड़ों का हवाला दिया और विपक्ष ने शोर शराबा किया कि वो झूठ बोल रहे हैं तो सलमान ने तपाक से कहा, ‘‘ जो कहूंगा सच कहूंगा....महीना ही कुछ ऐसा है.’’ वो रमज़ान के महीने का हवाला दे रहे थे कि इस समय वो झूठ बोल ही नहीं सकते.

इतना ही नहीं उन्होंने यशवंत सिन्हा की भी चुटकी ली. खुर्शीद ने कहा, '' आपने हज़ारीबाग का ज़िक्र किया तो मैं भी फ़र्रुखाबाद का ज़िक्र करना चाहूंगा. आखिर आप भी वहां से हारे हैं और हम भी अपनी सीट से हारे थे.''

लेकिन हद तो तब हुई जब भाषण के अंत में उन्होंने दीवार फ़िल्म के प्रसिद्ध डॉयलॉग मेरे पास मां है की तर्ज़ पर डॉयलॉग बोला.

खुर्शीद ने कहा, ‘‘ वो कहते हैं न कि मेरे पास सबकुछ है और तुम्हारे पास क्या है..मैं ये कहना चाहता हूं कि विपक्ष के पास सबकुछ है हमारे पास डॉक्टर मनमोहन सिंह है.’’

इस डॉयलॉग पर विपक्ष ने थोड़ा शोरशराबा किया लेकिन फिर मूड हल्का हो गया.

हां, एक और बात ज़रुर रही सलमान खुर्शीद के भाषण के दौरान. महंगाई पर बहस में खुर्शीद बार बार इस बात का हवाला देते रहे कि संसद ही सर्वोच्च है और फैसले करने का अधिकार उसी को है.

खुर्शीद ने अन्ना हज़ारे का नाम लिए बगैर कहा कि सांसदों को पत्र लिखा गया है कि वो संसद में फै़सला न लें और सांसदों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए.

प्रेक्षकों का मानना है कि अन्ना हज़ारे की प्रस्तावित 16 अगस्त की हड़ताल से कांग्रेस चिंतित है और वो इस मुद्दे पर सभी पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में है.

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